भोपाल, भारत में चीतों को फिर से बसाने की परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। अफ्रीका से लाए गए चीतों ने भारत में ही बच्चों को जन्म दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि चीतों के लिए भारत का वातावरण अनुकूल है। यह बात 17 सितंबर को 'प्रोजेक्ट चीता' के दो साल पूरे होने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी कि एनटीसीए ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है।
रिपोर्ट में और क्या लिखा है?
रिपोर्ट में बताया गया है कि दो साल में 17 चीता शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 12 जीवित हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, 'यह तथ्य कि प्रोजेक्ट के आरंभ में ही चीते कूनो में प्रजनन करने में सक्षम हो गए हैं, इस बात का सशक्त संकेत है कि पर्यावास की स्थितियां उनके जीवित रहने के लिए उपयुक्त हैं। इस प्रारंभिक सफलता से पता चलता है कि फिर से उन्हें बसाने के प्रयास अच्छी तरह से आगे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा कूनो में पर्यावरण स्थिर और उन्नत चीता आबादी को सहारा देने के लिए अनुकूल है।'
चीतों का प्रजनन चुनौती
एनटीसीए, भारतीय वन्यजीव संस्थान और मध्य प्रदेश वन विभाग ने मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जानवरों के नए वातावरण में घुलने-मिलने का सबसे अच्छा उदाहरण प्रजनन है। इससे पता चलता है कि वे स्वस्थ हैं और अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। हालांकि, चीतों का प्रजनन कई कारणों से एक चुनौती है। उनकी आनुवंशिक विविधता कम होने से प्रजनन क्षमता कम हो जाती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
खुले में छोड़े जाने तैयार हैं चीते
यह रिपोर्ट भारत में चीतों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दर्शाता है कि भारत सरकार चीतों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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