2019 बैच के प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को नगर मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के कुछ ही समय बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया। उनके इस्तीफे और निलंबन के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भारी बहस शुरू हो गई। अग्निहोत्री का कहना है कि उन्होंने सरकार की नीतियों, विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और एससी/एसटी कानून को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी।
केदार घाट की शांति और शंकराचार्य से आशीर्वाद
सप्ताहांत में अग्निहोत्री ने वाराणसी के केदार घाट स्थित श्रीविद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह भेंट किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं थी, बल्कि एक शुभ संयोग था। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने पहले प्रयागराज में मिलने का निमंत्रण दिया था, लेकिन समय की कमी के कारण वह नहीं जा सके।
छह फरवरी का अल्टीमेटम और सात फरवरी का आंदोलन
अग्निहोत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार 6 फरवरी तक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को वापस नहीं लेती, तो वह सात फरवरी से सवर्ण समाज के संगठनों के साथ दिल्ली में देशव्यापी आंदोलन करेंगे। उनका दावा है कि एससी/एसटी अधिनियम को लागू करने से लगभग 85 प्रतिशत लोग प्रभावित हैं और 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं।
एससी/एसटी अधिनियम पर विवाद
अलंकऱ अग्निहोत्री ने इस कानून को 1989 में लागू किए गए देश का "सबसे काला कानून" करार दिया। उनका कहना है कि इससे आम जनता के बीच भारी असंतोष है और सरकार का बड़ा मतदाता वर्ग इससे नाराज है। उन्होंने UGC के नए नियमों को भी लोगों में आक्रोश का कारण बताया।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
अग्निहोत्री के इस्तीफे और निलंबन ने प्रशासनिक और राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया है। उनके आंदोलन की घोषणा ने देशभर में सवर्ण समाज के संगठनों में हलचल मचा दी है और केंद्र सरकार के सामने अगले सप्ताह गंभीर दबाव बनाने की संभावना बढ़ गई है।
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