केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2026 का सबसे बड़ा राजनीतिक चुनौती यह थी कि वह चार चुनावी राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के मतदाताओं तक पहुँचे, वह भी बिना किसी प्रत्यक्ष लोकलुभावन घोषणा के. अपने बजट भाषण में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार “जन-लुभावन” की जगह “जन-शक्ति” पर भरोसा करती है. इसी सोच के अनुरूप उन्होंने किसी भी प्रमुख कल्याणकारी योजना में बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती, युवाओं की क्षमता-वृद्धि और उन उद्योगों को सहारा देने के उपायों पर जोर दिया जो वैश्विक परिस्थितियों और अमेरिकी शुल्कों से प्रभावित हुए हैं.
चुनाव-प्रधान राज्यों की राजनीति और केंद्रीय संदेश
असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में अप्रैल–मई तक चुनाव प्रस्तावित हैं. भाजपा असम में अपनी स्थिति बनाए रखने की तैयारी कर रही है, जबकि बंगाल, तमिलनाडु और केरल में अपने प्रदर्शन को बेहतर करने का लक्ष्य रखती है. बजट में दिए गए प्रावधान इन राज्यों के लिए प्रत्यक्ष रूप से राहत पैकेज नहीं हैं, बल्कि आर्थिक क्षमता, सप्लाई-चेन सुधार, व्यापारिक अवसरों और औद्योगिक स्थिरता के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक प्रभाव बनाने का प्रयास दर्शाते हैं.
वैश्विक व्यापारिक दबाव और तमिलनाडु का महत्व
वित्त मंत्री द्वारा पहनी गई कांचीवरम साड़ी केवल सांस्कृतिक सम्मान नहीं बल्कि तमिलनाडु की वस्त्र-विरासत और वर्तमान संकट की ओर संकेत भी थी. अमेरिकी शुल्कों से तमिलनाडु का वस्त्र उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जिसके कारण लाखों रोजगार संकट में हैं. हाल ही में संपन्न भारत–यूरोप व्यापार समझौता इस क्षेत्र के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है, जिससे श्रम-प्रधान वस्त्र उद्योग को वैश्विक बाजारों में स्थिरता मिलेगी.
वस्त्र उद्योग में सुधार, विस्तार और आधुनिकीकरण
बजट में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की घोषणा उन राज्यों के लिए बड़ा संकेत है जहाँ पारंपरिक वस्त्र उद्योग अब भी विशाल रोजगार देता है. “नेशनल फाइबर स्कीम” के अंतर्गत रेशम, ऊन, जूट, मैन-मेड फाइबर और नई पीढ़ी के फाइबरों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य रखा गया है. “टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम” के माध्यम से पारंपरिक उत्पादन क्लस्टरों का आधुनिकीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिसका प्रत्यक्ष लाभ तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों को मिल सकता है.
निर्यातकों को राहत और कारोबार में सुगमता
वस्त्र वस्तुओं, चमड़ा उत्पादों तथा सिंथेटिक व लेदर फुटवियर के निर्यातकों के लिए निर्यात दायित्व अवधि को छह महीने से बढ़ाकर बारह महीने करना एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे कार्य-पूंजी प्रबंधन आसान होगा, अनुपालन दवाब कम होगा और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. पश्चिम बंगाल, जो चमड़ा उद्योग का प्रमुख केंद्र है, इस निर्णय से विशेष लाभ की उम्मीद कर सकता है.
वैश्विक संकटों से प्रभावित क्षेत्रों को सहारा
दुर्लभ खनिजों की सप्लाई-चेन बाधाओं को दूर करने और छोटे-मझोले उद्यमों के लिए क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देकर सरकार ने यह संकेत दिया है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार यही क्षेत्र होंगे. नए व्यापार समझौतों से उत्पन्न अवसरों का लाभ युवा पीढ़ी को दिलाने के उद्देश्य से कौशल-विकास और प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया है, जो चुनावी राज्यों में रोजगार की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है.
दीर्घकालिक दृष्टि और राजनीतिक संतुलन का समन्वय
बजट 2026 पारंपरिक चुनावी वर्ष के लोकलुभावन प्रलोभनों से दूर दिखाई देता है. यह विकास की उस रूपरेखा को सामने रखता है जो अल्पकालिक लाभ की जगह दीर्घकालिक स्थिरता को आधार बनाती है. चारों चुनावी राज्यों के लिए यह संदेश स्पष्ट है कि उद्योग-आधारित विकास, कौशल-संपन्न युवा, सुगम व्यापारिक माहौल और मजबूत निर्यात प्रणाली ही आगामी वर्षों में उनकी आर्थिक दिशा तय करेंगे. यह राजनीतिक रूप से संयत और आर्थिक रूप से दूरदर्शी रणनीति का संकेत है, जिसका प्रभाव चुनावी परिणामों से परे जाकर दिखाई देगा.
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