बुधवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि यह सत्र केवल बजट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने सरकार के रुख पर असंतोष जताया।
मनरेगा को लेकर सीधा हमला
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मनरेगा को सत्र का प्रमुख मुद्दा बताया है। विपक्ष का आरोप है कि नए कानून के जरिए न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, बल्कि ग्रामीण रोजगार की मूल भावना को भी कमजोर किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा रही है और इसे कमजोर करना सामाजिक अन्याय है।
विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव पर सवाल
राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय मंच पर अस्पष्ट होती जा रही है। अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ, रूसी तेल की खरीद और वैश्विक गठबंधनों में भारत की भूमिका पर विपक्ष सरकार से स्पष्ट जवाब चाहता है।
अर्थव्यवस्था, रुपया और महंगाई का मुद्दा
विपक्ष ने डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत को सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे महंगाई बढ़ रही है और आम आदमी पर सीधा असर पड़ रहा है। बजट सत्र में इस पर विस्तार से चर्चा की मांग की जाएगी।
वायु प्रदूषण और जनस्वास्थ्य का संकट
दिल्ली समेत कई शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को विपक्ष ने गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बताया है। इसके साथ ही इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा भी संसद में उठाया जाएगा। विपक्ष का कहना है कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के मोर्चे पर सरकार की उदासीनता सामने आ चुकी है।
संवैधानिक संस्थाओं और अधिकारों पर बहस
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और संविधान से मिले अधिकारों का हनन हो रहा है। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा, ‘वोट चोरी’ और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को भी सत्र के दौरान प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।
अन्य दलों के क्षेत्रीय मुद्दे भी होंगे शामिल
तेलुगू देसम पार्टी ने मुक्त व्यापार समझौतों और अमरावती को कानूनी दर्जा देने की मांग उठाने की बात कही है। वहीं बीजू जनता दल ओडिशा में किसानों की परेशानियों और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मुद्दा संसद में रखने की तैयारी में है। इससे स्पष्ट है कि बजट सत्र में सरकार को बहुआयामी विपक्षी दबाव का सामना करना पड़ेगा।
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