‘Budget’ शब्द की जड़ें फ्रेंच भाषा के शब्द ‘Bougette’ में मिलती हैं, जिसका अर्थ होता है छोटा थैला या बैग। ब्रिटेन में वित्त मंत्री संसद में अपने वित्तीय प्रस्ताव एक चमड़े के बैग में लेकर आते थे, जिसे ‘Budget’ कहा जाने लगा। धीरे-धीरे यह शब्द उस थैले के भीतर रखे वित्तीय दस्तावेजों के लिए इस्तेमाल होने लगा और फिर पूरी आर्थिक योजना के लिए प्रचलित हो गया।
ब्रिटेन से भारत तक बजट परंपरा का सफर
भारत में बजट की परंपरा ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई। ब्रिटिश प्रशासन ने अपने राजस्व और खर्चों की योजना बनाने के लिए बजट प्रणाली को लागू किया। स्वतंत्रता से पहले भारत का बजट मुख्य रूप से औपनिवेशिक हितों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाता था।
भारत का पहला बजट: एक ऐतिहासिक क्षण
भारत में पहली बार बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। यह बजट ब्रिटिश भारत के पहले वित्त सदस्य जेम्स विल्सन ने प्रस्तुत किया था। जेम्स विल्सन को भारत में आधुनिक बजट प्रणाली की नींव रखने वाला माना जाता है।
क्यों पेश किया गया था पहला बजट
1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार को भारत में प्रशासनिक सुधारों और राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी उद्देश्य से जेम्स विल्सन ने पहला बजट पेश किया, जिसमें आयकर की शुरुआत, सरकारी खर्चों का ब्यौरा और वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया गया।
स्वतंत्र भारत में बजट की शुरुआत
आजादी के बाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया। यह बजट एक नवस्वतंत्र राष्ट्र की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज था, जिसमें विकास, पुनर्निर्माण और आत्मनिर्भरता की झलक दिखाई दी।
आज के बजट की ऐतिहासिक जड़ें
आज का भारतीय बजट डिजिटल, विस्तृत और विकासोन्मुख हो चुका है, लेकिन इसकी जड़ें उसी परंपरा में हैं, जिसकी शुरुआत ‘Bougette’ नाम के एक छोटे थैले से हुई थी। बजट आज भी सरकार की आर्थिक सोच, नीतियों और प्राथमिकताओं का सबसे बड़ा आईना है।
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