रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में जिला कांग्रेस कमेटी और बूथ कांग्रेस कमेटियों के नए गठन के बाद अब सभी की निगाहें महिला कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर टिकी हुई हैं। महिला कांग्रेस के शीर्ष पद को लेकर सस्पेंस अपने चरम पर है। कांग्रेस हाईकमान ने इस पद के लिए दिल्ली में दावेदारों के इंटरव्यू पूरे कर लिए हैं, वहीं PCC चीफ दीपक बैज ने जल्द फैसला सामने आने के संकेत दिए हैं।
बीते ढाई साल से छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की कमान फूलोदेवी नेताम संभाल रही हैं। हालांकि कुछ समय पहले उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन संगठन ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद वे लगातार अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाती रहीं। अब AICC ने महिला कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
दिल्ली में इन 5 नेताओं का हुआ इंटरव्यू - AICC ने करीब 10 दिन पहले दिल्ली में महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए पांच वरिष्ठ महिला नेताओं के इंटरव्यू लिए। इनमें शामिल हैं—
- छन्नी साहू
- संगीता सिन्हा
- लक्ष्मी ध्रुव
- ममता चंद्राकर
- तूलिका कर्मा ...... दो नाम सबसे आगे
दिल्ली में हुए साक्षात्कार के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुकाबला मुख्य रूप से दो नामों—छन्नी साहू और संगीता सिन्हा—के बीच सिमट गया है। दोनों ही नेता महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा की टीम का हिस्सा रह चुकी हैं, यही वजह है कि इन्हें सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, संगीता सिन्हा को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खेमे के करीब माना जाता है, जबकि छन्नी साहू को पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव खेमे का समर्थन मिलने की चर्चा है।
जल्द होगा फैसला : दीपक बैज
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कांग्रेस हाईकमान का फैसला जल्द सामने आएगा।
भाजपा का कांग्रेस पर तंज
इधर भाजपा ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर तंज कसना शुरू कर दिया है। भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस में कई तरह की कांग्रेस चल रही हैं—सोनिया कांग्रेस अलग, राहुल कांग्रेस अलग, प्रियंका कांग्रेस अलग और खड़गे की कांग्रेस अलग। पहले यह तय करें कि कौन सी कांग्रेस क्या काम करेगी।
हाईकमान के फैसले का इंतजार
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए इंटरव्यू भले ही पूरे हो चुके हों, लेकिन अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को लेना है। अब देखना दिलचस्प होगा कि संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक समीकरणों के बीच किस नेता को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
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