ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान जब भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य कार्रवाई का पक्ष मजबूती से रखना था, तब कर्नल सोफिया कुरैशी ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई। विदेश सचिव के प्रारंभिक वक्तव्य के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर प्रेस ब्रीफिंग की। उनकी स्पष्ट भाषा, तथ्यपरक प्रस्तुति और संतुलित आत्मविश्वास ने पाकिस्तान के दावों को बेनकाब करते हुए भारत की रणनीतिक सोच को दुनिया के सामने रखा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर छोड़ी गहरी छाप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कर्नल कुरैशी का शांत लेकिन सख्त व्यक्तित्व अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। बिना किसी आक्रामकता के, उन्होंने तथ्यों और प्रमाणों के साथ भारत की सैन्य कार्रवाई को परिभाषित किया। उनकी संवाद शैली को वैश्विक विश्लेषकों ने “डिप्लोमैटिक मिलिट्री कम्युनिकेशन” का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
सैन्य परंपरा से जुड़ा पारिवारिक संस्कार
कर्नल सोफिया कुरैशी का जन्म 1974 में गुजरात के वडोदरा में एक सैन्य परिवार में हुआ। उनके दादा भारतीय सेना में धार्मिक शिक्षक थे, जिससे अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति का संस्कार उन्हें विरासत में मिला। बचपन से ही सेना के माहौल में पली-बढ़ी सोफिया ने राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।
शिक्षा और प्रशिक्षण में उत्कृष्टता
उन्होंने महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी, वडोदरा से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की। इसके बाद ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई से कमीशन हासिल किया। प्रशिक्षण के दौरान ही उनकी रणनीतिक सोच, सिग्नल इंटेलिजेंस और नेतृत्व क्षमता ने वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान खींचा। वे हर चुनौती में अनुशासन और बौद्धिक स्पष्टता का उदाहरण रहीं।
2016 में रचा सैन्य इतिहास
वर्ष 2016 में कर्नल सोफिया कुरैशी ने इतिहास रचते हुए बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘एक्सरसाइज फोर्स 18’ में भारतीय दल का नेतृत्व किया। यह पहली बार था जब किसी महिला अधिकारी ने ऐसे अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय टुकड़ी की कमान संभाली। इसमें कई आसियान देश शामिल थे और भारत की ओर से 40 सदस्यीय दल का नेतृत्व उन्होंने सफलतापूर्वक किया।
विशिष्ट सेवा मेडल: नेतृत्व और सेवा की पहचान
विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) भारतीय सशस्त्र बलों का एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो असाधारण नेतृत्व, रणनीतिक दक्षता और उत्कृष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। कर्नल सोफिया कुरैशी को यह सम्मान मिलना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और क्षमता का भी प्रतीक है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
कर्नल सोफिया कुरैशी आज उन हजारों युवतियों के लिए प्रेरणा हैं, जो सेना में करियर बनाने का सपना देखती हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि योग्यता, साहस और समर्पण के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।
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