कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट है। उनके अनुसार, संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्षी दलों ने पूरे सम्मान और गरिमा के साथ सरकार के फैसलों का विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा को बिना आम सहमति और संख्या बल के आधार पर “बुलडोजर” की तरह खत्म किया गया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान दर्ज कराया विरोध
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के समय विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपना विरोध प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी अव्यवस्था के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अधिकारों की रक्षा के लिए था।
लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष की चेतावनी
कांग्रेस नेता ने दो टूक कहा कि मनरेगा की बहाली की मांग को लेकर विपक्ष पीछे नहीं हटेगा। संसद से लेकर सड़क तक, और संवैधानिक दायरों के भीतर रहते हुए सभी लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ है।
‘विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम’ पर विवाद
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में ‘विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम’ की सराहना करते हुए कहा कि इससे गांवों के विकास को नई गति मिलेगी और भ्रष्टाचार व लीकेज पर रोक लगेगी। जैसे ही इस कानून का उल्लेख हुआ, विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया और इसे वापस लेने की मांग उठाई।
कांग्रेस का आरोप: मनरेगा को खत्म करने की साजिश
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि नए कानून के जरिए मनरेगा की मूल भावना को कमजोर किया गया है। उनका कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार की गारंटी को सीमित करता है और गरीबों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। इसी वजह से इसे “मनरेगा को खत्म करने” की कोशिश बताया जा रहा है।
पिछले सत्र में विधेयक पारित होने पर नाराजगी
गौरतलब है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बावजूद संसद के पिछले सत्र में ‘विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार गारंटी विधेयक’ पारित किया गया था। विपक्ष का कहना है कि इस विधेयक को बिना व्यापक चर्चा और सहमति के पारित किया गया, जो संसदीय लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।
ग्रामीण राजनीति में मनरेगा का महत्व
मनरेगा लंबे समय से ग्रामीण भारत में रोजगार, पलायन रोकने और न्यूनतम आय सुरक्षा का बड़ा माध्यम रहा है। कांग्रेस का तर्क है कि इस कानून को कमजोर करना न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक असंतोष को भी बढ़ा सकता है। यही कारण है कि विपक्ष इसे एक राजनीतिक मुद्दे के साथ-साथ सामाजिक न्याय का सवाल भी मान रहा है।
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