बजट सत्र की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि आर्थिक सर्वे और बजट जैसे अहम दस्तावेजों पर व्यापक चर्चा और राजनीतिक सहमति की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा सरकार इसे औपचारिकता तक सीमित कर देती है। कांग्रेस के अनुसार, यह रवैया संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है।
पीएम मोदी के बयान पर कांग्रेस का सीधा हमला
कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे प्रत्येक सत्र की शुरुआत से पहले देश को वही “पाखंड से भरा संदेश” देते हैं। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री संसद को केवल पृष्ठभूमि के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जबकि असली संवाद और बहस से बचते हैं। कांग्रेस का दावा है कि आज का विरोध-प्रदर्शन इसी निरंतर चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है।
सर्वदलीय बैठकों से दूरी का आरोप
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए न तो सर्वदलीय बैठकें बुलाते हैं और न ही उनकी अध्यक्षता करते हैं। कांग्रेस के अनुसार, इससे संसद की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया कमजोर होती है और विपक्ष की भूमिका सीमित कर दी जाती है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।
विधायी प्रक्रिया पर उठे सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार अंतिम समय में विधेयक पेश कर आवश्यक विधायी जांच के बिना उन्हें संसद से पारित करवा लेती है। जयराम रमेश के मुताबिक, इससे न केवल कानूनों की गुणवत्ता पर असर पड़ता है, बल्कि संसदीय विमर्श की परंपरा भी कमजोर होती है। उनका कहना है कि संसद बहस का मंच है, न कि केवल सरकारी मुहर लगाने की संस्था।
संसद के बजाय चुनावी मंच पर संवाद का आरोप
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री संसद में बैठकर विपक्षी नेताओं की चिंताओं का जवाब देने से बचते हैं और इसके बजाय दोनों सदनों के दौरान चुनावी रैलियों जैसे भाषण देते हैं। पार्टी का मानना है कि इससे संसद की गरिमा और उसकी भूमिका पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
‘देश के नाम संदेश’ पर कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस का आरोप है कि प्रत्येक सत्र की शुरुआत में संसद को पृष्ठभूमि बनाकर दिया जाने वाला ‘देश के नाम संदेश’ वास्तविक संवाद से ज्यादा राजनीतिक प्रचार का माध्यम बन गया है। जयराम रमेश ने कहा कि आज का विरोध इसी श्रृंखला की कड़ी है, जिसका उद्देश्य सरकार की इस कार्यशैली पर सवाल उठाना है।
राजनीतिक टकराव और आगे की राह
आर्थिक सर्वे और बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है। जहां सरकार अपने आर्थिक दृष्टिकोण को मजबूती से पेश करने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस संसद की भूमिका, संवाद और पारदर्शिता को लेकर दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है।
Comments (0)