नई दिल्ली | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विजयादशमी और दशहरा के पावन अवसर पर देश-विदेश में रह रहे भारतीयों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेशों में दोनों ने सत्य, धर्म और न्याय की विजय का उल्लेख करते हुए देशवासियों से विकसित, शांतिपूर्ण और समावेशी भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से उनके कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विजयादशमी की शुभकामनाएं साझा कीं। संदेश में कहा गया कि भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला यह पर्व अधर्म और अन्याय पर धर्म तथा न्याय की जीत का प्रतीक है। राष्ट्रपति ने भगवान श्रीराम को धर्म और नैतिक आचरण का स्वरूप बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों पर आधारित है। उन्होंने देशवासियों से अपनी सांस्कृतिक विरासत के उच्च आदर्शों का अनुसरण करने और विकसित भारत तथा समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने इस पावन अवसर पर सभी देशवासियों के सुख, आरोग्य और कल्याण की कामना भी की।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी दी बधाई
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी दशहरा और विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों तथा दुनिया भर में बसे भारतीयों को शुभकामनाएं दीं। उनके कार्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा संदेश में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और साझा सभ्यतागत मूल्यों का उल्लेख किया गया। संदेश में कहा गया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाने वाले ये त्योहार ‘विविधता में एकता’ की भावना को दर्शाते हैं।
सत्य और न्याय में विश्वास मजबूत करने का संदेश
उपराष्ट्रपति के संदेश में कहा गया कि दशहरा और विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की शाश्वत जीत की याद दिलाते हैं। ये पर्व सत्य, धर्म और न्याय में विश्वास को मजबूत करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये त्योहार समाज में सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देंगे तथा सभी को शांतिपूर्ण, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने की प्रेरणा देंगे।
विजयादशमी का क्या है संदेश?
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से जुड़ा यह पर्व लोगों को सत्य, मर्यादा, नैतिकता और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के संदेशों में भी इन्हीं मूल्यों के साथ राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और देश के विकास में नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया गया।