आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद तेज गति से आगे बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय और संरचनात्मक सुधार विकास को सहारा दे रहे हैं। रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि आने वाला वर्ष अवसरों के साथ-साथ चुनौतियां भी लेकर आएगा, जिनसे निपटने के लिए नीतिगत संतुलन आवश्यक होगा।
महंगाई को लेकर राहत और सावधानी दोनों
सर्वे में अनुमान जताया गया है कि अगले वित्त वर्ष में महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी संभव है, लेकिन यह भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित दायरे में ही रहेगी। इससे संकेत मिलता है कि कीमतों पर नियंत्रण पूरी तरह नहीं टूटेगा। हालांकि, सरकार ने यह भी माना है कि कुछ क्षेत्रों में लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं पर सीमित दबाव बन सकता है।
रुपये की कमजोरी और इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन
रुपये में गिरावट को सर्वे ने एक महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में चिन्हित किया है। कमजोर मुद्रा के कारण आयात महंगा हो सकता है, जिससे इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन बढ़ने की आशंका रहती है। विशेष रूप से सोना, चांदी और तांबे जैसी धातुओं की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतें कोर इन्फ्लेशन पर दबाव डाल सकती हैं, जिसका असर उद्योग और उपभोक्ता दोनों पर पड़ेगा।
कमोडिटी कीमतों और खाद्य महंगाई से राहत
सर्वे में राहत की बात यह है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और अन्य प्रमुख कमोडिटी की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। इसके अलावा, अच्छी फसल और पर्याप्त आपूर्ति के चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतें काबू में रहने की संभावना जताई गई है। इससे समग्र महंगाई को सीमित रखने में मदद मिल सकती है।
उद्योग और व्यापार समझौतों का प्रभाव
आर्थिक सर्वे के साथ हालिया भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का असर भी चर्चा में है। ऑटो सेक्टर में यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क घटने से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है, जिससे घरेलू कंपनियों पर दबाव आ सकता है। इसी तरह वाइन उद्योग में यूरोपीय वाइन के सस्ती होने से भारतीय उत्पादकों को रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
ब्याज दरों में कटौती की संभावनाए
महंगाई के नियंत्रण में रहने और विकास को गति देने के उद्देश्य से आरबीआई द्वारा 0.25 प्रतिशत की ब्याज दर कटौती की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि यह मौजूदा साइकिल की अंतिम कटौती हो सकती है। इससे होम लोन और ऑटो लोन जैसे क्षेत्रों में मांग को कुछ राहत मिल सकती है।
सतर्कता के साथ मजबूत ग्रोथ
आर्थिक सर्वे 2026 का निष्कर्ष स्पष्ट है कि भारत की विकास कहानी मजबूत बनी हुई है। हालांकि, कमजोर रुपया, वैश्विक बाजार की अस्थिरता और महंगाई के संभावित दबावों को देखते हुए सरकार और नीति-निर्माताओं को सावधानी से कदम उठाने होंगे, ताकि विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बना रहे।
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