नई दिल्ली. भारतीय चुनाव आयोग के भीतर मचे अंदरूनी घमासान और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर विवाद में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की तरफ से कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को लिखी गई गोपनीय चिट्ठियों में वरिष्ठ डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के उस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसके जरिए आयोग के आईटी विभाग पर से निगरानी का स्तर ही खत्म कर दिया गया था। यह पूरा मामला चुनाव आयोग की डीजी आईटी डॉ. सीमा खन्ना के कामकाज और उनकी फाइलों को सीधे बड़े अधिकारियों तक भेजने के लिए रूटिंग प्रक्रिया में किए गए नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। आंतरिक असहमति अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।
कैबिनेट सचिव को क्यों लिखी गई चिट्ठी
जुलाई 2026 में चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने कैबिनेट सचिव को एक जैसी भाषा में दो अलग-अलग पत्र भेजे थे। पत्रों में स्पष्ट किया गया था कि वरिष्ठ डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने एक आदेश जारी कर आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना की फाइलों की समीक्षा करने वाले डिप्टी चुनाव आयुक्त संजय कुमार की भूमिका को बीच से हटा दिया था। चुनाव आयुक्तों ने तर्क दिया कि संजय कुमार एक वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारी हैं जो पूरी चुनाव प्रक्रिया की समझ रखते हैं। सीमा खन्ना की फाइलें सीधे मनीष गर्ग के जरिए भेजे जाने से आईटी विभाग की समीक्षा प्रणाली कमजोर हुई थी। इस बदलाव को नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा गया।
आईटी विभाग की निगरानी खत्म करने का आरोप
चिट्ठियों में आरोप लगाया गया कि मनीष गर्ग के आदेश से आईटी विभाग पर बहुस्तरीय निगरानी की व्यवस्था समाप्त हो गई। पहले फाइलें डिप्टी चुनाव आयुक्त संजय कुमार के माध्यम से समीक्षा के बाद आगे जाती थीं लेकिन नए आदेश के बाद यह प्रक्रिया सीधे हो गई। चुनाव आयुक्तों का मानना था कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई। आईटी विभाग चुनाव प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं को संभालता है इसलिए उसकी निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस फैसले ने आयोग के अंदरूनी कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए। एसआईआर विवाद के बीच यह खुलासा और संवेदनशील हो गया है।
सीमा खन्ना और रूटिंग प्रक्रिया का विवाद
मामला चुनाव आयोग की डीजी आईटी डॉ. सीमा खन्ना के कामकाज से भी जुड़ा है। उनकी फाइलों को सीधे बड़े अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए रूटिंग प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। चुनाव आयुक्तों ने इसे नियमों के उल्लंघन के रूप में चिन्हित किया। संजय कुमार जैसी अनुभवी अधिकारी की भूमिका हटाने से आईटी विंग की स्वतंत्र समीक्षा प्रभावित हुई। गोपनीय चिट्ठियों में इन बिंदुओं को विस्तार से रखा गया था। कैबिनेट सचिव को संबोधित इन पत्रों ने आयोग के उच्च स्तर पर असहमति को उजागर किया। अब यह मामला व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है।
आंतरिक असहमति और आगे की स्थिति
चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखी चिट्ठियां आंतरिक मतभेद को दर्शाती हैं। मनीष गर्ग पर उठे सवालों के बावजूद वे आईटी विंग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले संभाल रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया और तकनीकी विभाग की निगरानी को लेकर ये आरोप आयोग की विश्वसनीयता पर असर डाल सकते हैं। आलाकमान स्तर पर इस मुद्दे की गंभीरता को समझा जा रहा है। आगे की कार्रवाई और जांच की संभावनाएं बनी हुई हैं। पारदर्शिता बनाए रखना चुनाव आयोग की प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।