ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 ने इस वर्ष भारत के लिए विशेष खुशी का क्षण रचा, जब शिक्षिका रूबल नागी को शिक्षण के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में, दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने उन्हें 10 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि के साथ यह सम्मान प्रदान किया। 139 देशों से आए 5,000 से अधिक नामांकनों में से चयनित होना इस बात का प्रमाण है कि उनके काम ने वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
10 लाख बच्चों तक शिक्षा की पहुंच, कला बनी सीखने का सेतु
पिछले दो दशकों में रूबल नागी ने कला को शिक्षा का माध्यम बनाकर वंचित बच्चों के लिए सीखने के नए द्वार खोले हैं। उनके प्रयासों ने 10 लाख से अधिक बच्चों को स्कूल की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि शिक्षा का लक्ष्य केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह बच्चों की संवेदनाओं, अभिव्यक्ति और सोच को भी विकसित करना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी शिक्षण अवधारणा को देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचाया।
रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन: 800 शिक्षा केंद्रों का विशाल नेटवर्क
उनके संगठन रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन ने भारत के 100 से अधिक गरीब समुदायों और गांवों में 800 से अधिक शिक्षा केंद्र स्थापित किए हैं। ये केंद्र न केवल पढ़ाई के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराते हैं, बल्कि स्कूल से बाहर हो चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण कड़ी बनते हैं। इन केंद्रों में मनोसामाजिक सहायता, रचनात्मक गतिविधियाँ और नियमित शिक्षण सहयोग, बच्चों को पढ़ाई में बनाए रखने का मजबूत आधार बनते हैं।
सीखने की जीवंत दीवारें: परित्यक्त दीवारों से बनीं खुली कक्षाए
उनकी शिक्षण पद्धति का सबसे अभिनव पहलू है ‘सीखने की जीवंत दीवारों’ की अवधारणा। परित्यक्त दीवारों को इंटरैक्टिव भित्ति चित्रों में बदलकर उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई को रोचक बनाया, बल्कि बच्चों के लिए सार्वजनिक स्थानों को ही सीखने के सशक्त माध्यम में परिवर्तित कर दिया। इन दीवारों के माध्यम से बच्चों को पढ़ना, लिखना, गणित, स्वास्थ्य और पर्यावरण के मूलभूत सिद्धांत आसान और आकर्षक तरीके से सीखने को मिलते हैं। यह मॉडल शिक्षा की उस रूपरेखा का उदाहरण है, जिसमें संसाधनों की कमी भी नवाचार के सामने बाधा नहीं बनती।
स्कूल छोड़ने की दर में 50% से अधिक कमी, युवाओं के लिए नई संभावनाओं का द्वार
उनके कार्यक्रमों ने देश में शिक्षा छोड़ने की समस्या को काफी हद तक कम किया है। आंकड़े बताते हैं कि जहां ये मॉडल अपनाया गया, वहां स्कूल छोड़ने की दर में 50 प्रतिशत से अधिक कमी आई। इसके साथ ही बच्चों के लंबे समय तक पढ़ाई में टिके रहने की क्षमता भी बढ़ी है। रूबल नागी ने घोषणा की है कि पुरस्कार राशि का उपयोग एक ऐसे व्यावसायिक संस्थान की स्थापना में किया जाएगा, जो डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास का मुफ्त प्रशिक्षण प्रदान करेगा। इससे लाखों युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और रोजगार के नए अवसर हासिल करने का मार्ग खुलेगा।
वैश्विक पहचान की ओर भारतीय शिक्षा की सशक्त छलांग
यूनेस्को और वर्की फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत तथा GEMS Education द्वारा आयोजित यह सम्मान रूबल नागी के उस कार्य को मान्यता देता है, जिसने शिक्षा को परंपरागत ढांचे से निकालकर एक जीवंत सामाजिक आंदोलन का रूप दिया। उनका मॉडल न केवल भारत के लिए, बल्कि विश्व के कई देशों के लिए प्रेरक उदाहरण के रूप में उभर रहा है।
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