देश की सुरक्षा को लेकर भारतीय सेना ने सीमा प्रबंधन को एक नए और निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है। उत्तरी (LAC) और पश्चिमी (LoC) सीमाओं के पास अब दुश्मन का कोई भी ड्रोन यदि ज़मीन से 35 किलोमीटर के दायरे या 3 किलोमीटर की ऊंचाई में प्रवेश करता है, तो उसे बिना चेतावनी तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। यह फैसला चीन और पाकिस्तान की ओर से हथियारों से लैस और जासूसी ड्रोन की बढ़ती घुसपैठ के मद्देनज़र लिया गया है। साफ संदेश है—अब भारत के आसमान में कोई “टेस्टिंग” नहीं होगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली सैन्य सोच
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने ड्रोन युद्ध (Drone Warfare) को लेकर अपनी रणनीति में बड़े संरचनात्मक बदलाव किए हैं। नई रॉकेट रेजिमेंट्स का गठन, ड्रोन–रोधी प्रणालियों का एकीकरण और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण इसी रणनीति का हिस्सा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीमा क्षेत्रों में होने वाली करीब 97 प्रतिशत ड्रोन और एंटी-ड्रोन गतिविधियों का सीधा नियंत्रण अब थल सेना के पास होगा, जिससे निर्णय और कार्रवाई में देरी नहीं होगी।
सीमाओं पर बनेंगे एयर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
पश्चिमी सीमा (LoC) और उत्तरी सीमा (LAC) पर सेना Army Air Command and Control Centers स्थापित कर रही है। ये सेंटर चौबीसों घंटे दुश्मन के ड्रोन पर नज़र रखेंगे, साथ ही भारतीय ड्रोन ऑपरेशंस को भी नियंत्रित करेंगे। खतरे की पहचान होते ही ये केंद्र त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Kill Decision) के तहत दुश्मन ड्रोन को मार गिराने की कार्रवाई करेंगे।
30 हजार से अधिक ड्रोन तैनाती की तैयारी
भारतीय सेना की योजना के अनुसार, पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा पर लगभग 10,000 ड्रोन तैनात किए जाएंगे। वहीं चीन से लगी 3,488 किलोमीटर लंबी LAC पर 20,000 से अधिक ड्रोन हमेशा ऑपरेशनल स्थिति में रहेंगे। इनका उपयोग निगरानी, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, टारगेट ट्रैकिंग और आवश्यकता पड़ने पर जवाबी कार्रवाई के लिए किया जाएगा।
वायु सेना और खुफिया एजेंसियों से मजबूत तालमेल
यह अभियान केवल थल सेना तक सीमित नहीं है। सेना के कोर कमांडर भारतीय वायु सेना के क्षेत्रीय कमांडरों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति तैयार करेंगे। साथ ही, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संस्थानों से रियल-टाइम इनपुट साझा किए जाएंगे, ताकि किसी भी संभावित खतरे को सीमा पार करने से पहले ही निष्क्रिय किया जा सके।
स्पष्ट संदेश: आसमान भी अब सुरक्षित सीमा
भारत की यह नई नीति सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी है—देश की ज़मीन ही नहीं, अब उसका आसमान भी पूरी तरह सुरक्षित है। 35×3 किमी की यह “लक्ष्मण रेखा” साफ करती है कि भारत अब ड्रोन घुसपैठ को सहन नहीं करेगा, चाहे वह चीन की ओर से हो या पाकिस्तान की ओर से।
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