वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 2026 के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र को अभूतपूर्व बढ़ोतरी मिली है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में तेज़ बदलाव देखने को मिला है, और इसका स्पष्ट प्रतिबिंब ₹7,84,678 करोड़ के रक्षा बजट में दिखाई देता है। पिछले वर्ष की तुलना में 15% की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि सरकार सैन्य क्षमता, तकनीकी कौशल और सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद बढ़ी सैन्य तैयारी और खरीद जरूरतें
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान तथा पीओके में की गई सटीक सैन्य कार्रवाई—ऑपरेशन ‘सिंदूर’—ने देश की रक्षा जरूरतों को नई दिशा दी। इस ऑपरेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक युद्ध की जरूरतें तेज निर्णय, उन्नत हथियार प्रणालियों और तैयार सैन्य ढांचे की मांग करती हैं। इसी संदर्भ में रक्षा मंत्रालय ने पिछले वर्ष अतिरिक्त ₹64,000 करोड़ का बजट मांगा था, जो पूर्ण बजट उपयोग और आपात खरीद के चलते आवश्यक हो गया।
रक्षा सेवाओं के राजस्व और पूंजीगत व्यय में बड़ी बढ़ोतरी
कुल आवंटन में से ₹3.65 लाख करोड़ रक्षा सेवाओं के राजस्व व्यय पर और ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय पर खर्च किए जाएंगे। पूंजीगत मद में 21.8% की भारी वृद्धि इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में बड़े रक्षा सौदों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। बीते महीनों में ही सरकार लगभग ₹40,000 करोड़ की आपात खरीद कर चुकी है जिसमें ड्रोन, गोला-बारूद और महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियाँ शामिल हैं।
बड़े रक्षा सौदे: पनडुब्बी कार्यक्रम और राफेल भुगतान पर ध्यान
बजट में बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा यूरोपीय पनडुब्बी कार्यक्रम (€8–10 बिलियन) और राफेल लड़ाकू विमानों के लंबित भुगतान पर खर्च होने की संभावना है। इन दोनों परियोजनाओं को भारत की समुद्री और वायु शक्ति के आधुनिकीकरण का केंद्रीय आधार माना जा रहा है। हालांकि बड़े रक्षा सौदों का वास्तविक भुगतान कई वर्षों में चरणबद्ध तरीके से होता है, लेकिन इस बढ़े हुए आवंटन से स्पष्ट है कि भारत अपनी रणनीतिक क्षमताओं को तेज़ी से उन्नत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सैन्य आधुनिकीकरण और कल्याण पर भी मजबूत फोकस
रक्षा बजट में यह वृद्धि केवल खरीद तक सीमित नहीं है। यह सैनिकों के कल्याण, जीवन-स्तर सुधार और सैन्य ढांचे को आधुनिक रूप देने पर भी जोर देती है। हाल के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव ने यह दिखाया कि उन्नत लड़ाकू प्लेटफॉर्म, अत्याधुनिक तकनीक और स्मार्ट हथियार आज के युद्ध का मूल आधार बन चुके हैं। इसी कारण FY27 बजट में रक्षा खर्च में meaningful वृद्धि की उम्मीद पहले से ही बनाई जा रही थी, जिसे सरकार ने पूरा किया है।
रणनीतिक संदेश: भारत तैयार है, सक्षम है, और आगे बढ़ रहा है
रक्षा बजट में हुई यह छलांग न केवल भारत की आक्रामक सुरक्षा नीति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि देश अब किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद सरकार का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि भारत आधुनिक युद्ध तकनीक, उच्च-स्तरीय उपकरणों और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
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