मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जो बात कही, वह आज की दुनिया की सच्चाई को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता के कारण वैश्विक सहयोग कमजोर पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस का रिश्ता न केवल स्थिरता का प्रतीक है, बल्कि रणनीतिक तरीके से दोनों देशों को मजबूत भी करता है। यह साझेदारी इतिहास, भरोसे और साझा मूल्यों पर टिकी है, जो कठिन समय में जीवन रेखा की तरह काम कर रही है।
तेजी से बढ़ते व्यापारिक और सामरिक सहयोग की ताकत
CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले एक दशक में दोगुना से भी अधिक बढ़ चुका है। 2009–10 के 6.4 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब यह आंकड़ा 15.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि सिर्फ व्यापार की मजबूती नहीं दर्शाती, बल्कि रक्षा, सुरक्षा, विमानन, समुद्री सहयोग, ऊर्जा और उभरती तकनीकों में साझा प्रगति का परिणाम है। फ्रांस, भारत का एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार है, और राफेल से लेकर पनडुब्बियों तक, दोनों देश रणनीतिक मोर्चों पर समान रूप से जुड़े हैं।
वैश्विक तनावों के बीच स्थिरता की साझी जरूरत
CJI ने जोर देकर कहा कि दुनिया आज उस दौर में है, जहां विघटनकारी ताकतें अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। इस स्थिति में ऐसे देश, जो लोकतंत्र, कानून के शासन और शांतिपूर्ण वैश्विक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं, उन्हें एक साथ आना ही होगा। भारत और फ्रांस इसी साझा विचारधारा के चलते स्वाभाविक साझेदार बने हुए हैं। यह रिश्ता किसी भी अस्थिरता के बीच स्थिरता और दिशा देने का काम करता है।
न्यायिक सहयोग और क्रॉस-बॉर्डर विवाद समाधान का महत्व
कॉन्फ्रेंस का विषय था ‘क्रॉस-बॉर्डर डिस्प्यूट रेजोल्यूशन: कोर्ट्स, आर्बिट्रेशन एंड इंडिया–फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि वैश्विक व्यापार बढ़ रहा है और इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवाद भी जटिल हो रहे हैं। ऐसे में न्यायिक सहयोग, मध्यस्थता (Arbitration) और दोनों देशों के संस्थानों के बीच संवाद बेहद आवश्यक है। उन्होंने भारत के मध्यस्थता केंद्रों और पेरिस स्थित आर्बिट्रेशन संस्थानों के बीच साझेदारी को और गहरा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सदियों पुराने रिश्ते में भविष्य की संभावनाए
सीजेआई ने यह भी उल्लेख किया कि भारत–फ्रांस संबंध सुविधा आधारित रिश्ते नहीं हैं। यह सदियों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं। आज जब विश्व अनिश्चितता की ओर बढ़ रहा है, तो यह साझेदारी भरोसे और सहयोग का ऐसा मॉडल बनकर उभर रही है, जिसकी दुनिया को पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। आने वाले समय में यह संबंध न केवल रणनीतिक ताकत बढ़ाएंगे, बल्कि नवाचार, प्रौद्योगिकी और न्यायिक संसाधनों में भी नई संभावनाएं खोलेंगे।
लोकतांत्रिक मूल्यों ने मजबूत की रणनीतिक साझेदारी
CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत और फ्रांस की साझेदारी का आधार साझा लोकतांत्रिक मूल्य हैं। कानून का शासन, मानवाधिकार, वैश्विक शांति और न्यायपूर्ण व्यवस्था—ये चार स्तंभ दोनों देशों को करीब लाते हैं। इसीलिए भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी यह साझेदारी मजबूत खड़ी रहती है और दोनों देशों के लिए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग खोलती है।
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