कोलकाता डेस्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली। पाकिस्तान की ओर से भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल उठाए जाने के बाद भारत ने पलटवार करते हुए पाकिस्तान के अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए। भारत ने कहा कि जिस देश में अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी का अनुपात लगातार घट रहा है, उसे दूसरे देशों को अधिकारों पर उपदेश देने से पहले अपने यहां की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान के दावों को बताया ध्यान भटकाने की कोशिश
संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में कानून के शासन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के दौरान भारत की ओर से काउंसलर मिथिली आर. ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ धार्मिक अल्पसंख्यकों को लेकर बार-बार आरोप लगाना पाकिस्तान की अपनी समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश है।
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता, सैन्य अदालतों में नागरिकों के मुकदमों और राजनीतिक विपक्ष पर कथित दबाव जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने सवाल किया कि जब पाकिस्तान खुद कानून के शासन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो वह दूसरे देशों को इस विषय पर किस आधार पर नसीहत दे रहा है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उठाए सवाल
भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि देश के अस्तित्व में आने के बाद से उसकी आबादी में अल्पसंख्यकों का अनुपात लगातार घटा है। भारतीय प्रतिनिधि ने इसे पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल उठाने का आधार बताया।
भारत ने पाकिस्तान की नई विदेशी मीडिया सुविधा संबंधी गाइडलाइंस का भी जिक्र किया। इन नियमों के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर रिपोर्टिंग करने के लिए विदेशी मीडिया संस्थानों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेने की आवश्यकता बताई गई है। भारत ने इस व्यवस्था के संदर्भ में पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए।
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
संयुक्त राष्ट्र में अपने जवाब के दौरान भारत ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का भी उल्लेख किया, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। भारतीय प्रतिनिधि ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की कार्रवाई को संतुलित और लक्षित प्रतिक्रिया बताया।
भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में पाकिस्तान की ओर से लगाए जाने वाले आरोप उसकी अपनी जिम्मेदारियों से ध्यान नहीं हटा सकते। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि भारत के खिलाफ बार-बार आरोप दोहराने से पाकिस्तान अपने नागरिकों से किए गए वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
भारत का संदेश- कानून के शासन के लिए जवाबदेही जरूरी
भारत ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि कानून का शासन केवल दूसरों को सलाह देने का विषय नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी भी है। भारत के मुताबिक, पाकिस्तान को दूसरे देशों पर आरोप लगाने के बजाय अपने यहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों, न्यायिक स्वतंत्रता, राजनीतिक गतिविधियों और प्रेस की आजादी से जुड़े सवालों पर ध्यान देना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई यह बहस दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव को दर्शाती है। भारत ने एक बार फिर आतंकवाद और मानवाधिकारों के मुद्दे पर पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि आरोपों की पुनरावृत्ति से वास्तविक समस्याओं और जवाबदेही के सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।