कोलकाता: उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के मामले में पुलिस की जांच तेज हो गई है। जांच का एक अहम पहलू पंडाल से की गई वह माइक-घोषणा है, जिसके बाद दर्शनार्थियों में अफरा-तफरी फैलने की बात सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घोषणा किसने की, किन परिस्थितियों में की गई और क्या इससे भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया था। 22 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, कोलकाता पुलिस ने पूजा समिति के कोषाध्यक्ष संजीव राहा उर्फ सेंटू को नदिया जिले से हिरासत में लिया था। उनसे लालबाजार स्थित पुलिस मुख्यालय में पूछताछ की जानी थी। पुलिस दूसरे संदिग्ध की तलाश भी कर रही थी। उपलब्ध रिपोर्टों में कुशल मजूमदार को दूसरे उद्घोषक के रूप में हिरासत में लिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या माइक पर की गई घोषणा से फैली दहशत?
पुलिस सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के मुताबिक, घटना से पहले माइक पर पंडाल के ढांचे के गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से तुरंत बाहर निकलने की अपील की गई थी। इस घोषणा के बाद लोगों में घबराहट बढ़ने और निकास द्वार की ओर भीड़ उमड़ने की बात सामने आई है। हालांकि, यह जांच का विषय है कि घोषणा किसने की, क्या उसके पीछे कोई वास्तविक खतरा था और क्या लोगों को बाहर निकालने के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था मौजूद थी। घटना के कारणों को केवल एक घोषणा तक सीमित नहीं किया जा सकता। भीड़ की अधिकता, संकरे रास्ते, निकास व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
लालबाजार में पूछताछ, दूसरे संदिग्ध की तलाश
पुलिस जांच में पूजा समिति के पदाधिकारियों और आयोजन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। संजीव राहा से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि माइक पर घोषणा करने का निर्णय किसने लिया था और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसा करने के लिए कहा था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की मदद से घोषणा करने वाले व्यक्तियों की पहचान करने की कोशिश की है। दूसरे संदिग्ध का पता लगाने के लिए भी प्रयास जारी थे। ऑडियो रिकॉर्डिंग, तकनीकी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।
SIT की जांच में पंडाल की बनावट और निकास व्यवस्था भी अहम
चोरबागान हादसे की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की पड़ताल कर रही है। SIT की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता राय सरस्वती कर रही हैं। टीम को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सुरक्षा संबंधी सिफारिशें सौंपनी हैं। SIT प्रमुख ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पंडाल में कम रोशनी और प्रवेश तथा निकास के रास्तों की सीमित चौड़ाई जैसे पहलुओं का उल्लेख किया था। जांच में CCTV कैमरों की व्यवस्था, पुलिस और नागरिक प्रशासन की भूमिका तथा आयोजन समिति की तैयारियों को भी परखा जाएगा। जांच पूरी होने तक पंडाल की मौजूदा संरचना को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि साक्ष्यों की पड़ताल में बाधा न आए। हालांकि, SIT प्रमुख के बयान के अनुसार, पंडाल की संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है।
19 मौतों के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
17 अक्टूबर को चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस घटना ने बड़े धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन निकास और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस और SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे से पहले क्या हुआ, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कौन-से इंतजाम किए गए थे और क्या किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई। फिलहाल, किसी व्यक्ति की भूमिका या दोष को अंतिम रूप से तय करना जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उचित होगा।