भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज से 2 फरवरी से 4 फरवरी तक तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरान उनका प्रमुख फोकस अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में भाग लेना है। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, स्वच्छ ऊर्जा में बदलाव और रणनीतिक सहयोग के दिशा-निर्देश तय करना है। ऐसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा और उभरती तकनीकों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों का महत्व
अमेरिका में जयशंकर अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंध, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होगी। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी सहयोग और रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं मिलेंगी।
पूर्व वार्ता और तैयारियाँ
इस यात्रा से पहले, विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से नई दिल्ली में मुलाकात की थी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इसके अलावा, 25 जनवरी को अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से भी उनकी बातचीत हुई, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध और व्यापार वार्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ।
फोन पर हुई रणनीतिक समीक्षा
13 जनवरी को जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस वार्ता में नागरिक परमाणु ऊर्जा, व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग की समीक्षा की गई। अमेरिकी राजदूत ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए दोनों देशों के संभावित उच्चस्तरीय बैठकों की तैयारी की पुष्टि की।
भारत-अमेरिका साझेदारी को नया आयाम
जयशंकर की इस यात्रा से भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिलेगी। क्रिटिकल मिनरल्स, स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग से दोनों देशों को आर्थिक और तकनीकी लाभ होगा। यह दौरा भारत के वैश्विक प्रभाव को और भी मजबूती प्रदान करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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