पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं, बल्कि एक संवैधानिक टकराव के बीच उठाया गया निर्णायक राजनीतिक कदम है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राज्य और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते तनाव ने इस बैठक को बेहद अहम बना दिया है। मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर न केवल CEC ज्ञानेश कुमार से सवाल-जवाब करने के मूड में हैं, बल्कि विपक्षी नेताओं के साथ संवाद कर इसके खिलाफ बड़े राजनीतिक मोर्चे की भी तैयारियाँ कर रही हैं।
SIR पर बढ़ा विवाद: क्यों आक्रामक हुईं ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर मुख्यमंत्री ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्पेशल रोल ऑब्ज़र्वर (SRO) और माइक्रो-ऑब्जर्वर को ऐसी शक्तियाँ दे दी गई हैं, जो कहीं भी, किसी अन्य राज्य में लागू नहीं होतीं। ममता के अनुसार, इन अधिकारियों को अप्रूविंग अथॉरिटी का दर्जा देना SIR प्रक्रिया को निष्पक्ष निगरानी के बजाय "नियंत्रण का उपकरण" बना देता है।
उनके शब्दों में, यह पूरी प्रक्रिया संविधान की भावना, संघवाद और मूल अधिकारों की अवधारणा के विपरीत है।
ERC–AERC की भूमिका पर सवाल: ‘असहाय हो गए अधिकारी’
अपने पत्र में ममता बनर्जी ने स्पष्ट शिकायत दर्ज की कि चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक पंजीकरण अधिकारी (AERO) पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिए गए हैं। उनके अनुसार, माइक्रो-ऑब्जर्वर को दी गई अतिरिक्त शक्तियों ने वैधानिक जिम्मेदारियों के संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिसके चलते स्थानीय अधिकारी सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं।
मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जगह इसे एकतरफा और दखलकारी रूप दिया जा रहा है।
विपक्षी दलों से बैठक: दिल्ली में बनेगा व्यापक राजनीतिक गठजोड़?
ममता बनर्जी ने जानबूझकर बजट सत्र के दौरान दिल्ली पहुँचने का फैसला किया है, क्योंकि इस समय सभी प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेता राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद हैं।जानकारी के अनुसार, वे SIR के खिलाफ एक साझा राजनीतिक रुख बनाने की कोशिश करेंगी। यह कदम न सिर्फ राज्य के भीतर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर बहस को तेज कर सकता है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा का संदर्भ: दो बड़े प्रस्तावों की तैयारी
राज्य विधानसभा में भी इस मुद्दे का व्यापक प्रभाव दिखने वाला है। तृणमूल कांग्रेस सत्ता पक्ष दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करने जा रही है—
पहला, केंद्रीय जांच एजेंसियों CBI और ED की भूमिका पर कड़ी निंदा का प्रस्ताव।
दूसरा, राज्य में SIR की मौजूदा प्रक्रिया की औपचारिक निंदा का प्रस्ताव।
इसी कारण ममता 5 फरवरी से पहले कोलकाता लौटना चाहती हैं, जब "वोट ऑन अकाउंट" पेश होना है।
CEC से बैठक क्यों होगी ‘तूफानी’
शनिवार को भेजे गए मुख्यमंत्री के कड़े शब्दों वाले पत्र से पहले ही संकेत मिल गए थे कि यह बैठक सहज नहीं होगी। पत्र में ममता बनर्जी ने SRO और माइक्रो-ऑब्ज़र्वर की भूमिका को असंवैधानिक बताते हुए सीधे चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उनकी दिल्ली यात्रा में यह बैठक सबसे तनावपूर्ण पल हो सकती है, जहां वे SIR की पूरी प्रणाली पर विस्तृत स्पष्टीकरण और सुधार की मांग रखेंगी।
दिल्ली दौरे का राजनीतिक संदेश
ममता बनर्जी का यह कदम इस बात का भी संकेत है कि वे राज्य के प्रशासनिक मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना चाहती हैं। चुनाव आयोग की भूमिका, संघीय ढांचे में राज्यों के अधिकार, और चुनावी प्रक्रियाओं का संतुलन—ये सारे प्रश्न आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे सकते हैं।
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