केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र को व्यापक सुदृढ़ता देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजनाओं से लेकर अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान की स्थापना तक अनेक घोषणाएँ देश के स्वास्थ्य ढांचे को आधुनिक बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। कैंसर और कुछ आवश्यक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में राहत, जिला अस्पतालों के उन्नयन और आयुष से जुड़ी प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण के साथ इस बार मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रमुख प्राथमिकता के रूप में सामने रखा गया है, जिसे लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्र माना जाता रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को पाटने की दिशा में बड़ा निर्णय
भारत में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी को स्वीकार करते हुए वित्त मंत्री ने संस्थागत स्तर पर व्यापक सुधारों की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में उन्नत मानसिक स्वास्थ्य उपचार, विशेषज्ञ डॉक्टरों और काउंसलरों की व्यवस्थित ट्रेनिंग तथा शोध कार्यों को मजबूती देने की आवश्यकता अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। इसी सोच से उत्तर भारत में ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो-साइंसेज-2’ की स्थापना का निर्णय लिया गया है ताकि इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का कोई शीर्ष संस्थान न होने की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर किया जा सके।
उत्तर भारत में ‘निमहांस-2’ की उपयोगिता और प्रभाव
वर्तमान में देश का मुख्य निमहांस बेंगलुरु में स्थित है और इसे मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में सर्वोच्च संस्थानों में गिना जाता है। उत्तर भारत में नए निमहांस-2 के स्थापित होने से लाखों लोगों को न केवल अत्याधुनिक उपचार सुविधाएँ प्राप्त होंगी बल्कि इस क्षेत्र में नवीन शोध, न्यूरोसाइंस शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी अधिक सुलभ होगी। यद्यपि यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसे किस शहर में स्थापित किया जाएगा, परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की क्षेत्रीय असमानताओं को काफी हद तक समाप्त कर देगा।
रांची और तेजपुर में संस्थानों का उन्नयन
सरकार द्वारा रांची और तेजपुर के मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को भी क्षेत्रीय शीर्ष केंद्रों के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। रांची का सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री और तेजपुर का लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ अब गंभीर मानसिक रोग उपचार, ट्रॉमा मैनेजमेंट, मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस शिक्षा में अत्याधुनिक सुविधाओं से समृद्ध किए जाएंगे। इससे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की उम्मीद है।
युवाओं में बढ़ती मानसिक चुनौतियों का गंभीर संकेत
इकोनॉमिक सर्वे 2026 में मानसिक स्वास्थ्य को भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए प्रमुख चुनौती बताया गया है। सर्वे के अनुसार पंद्रह से चौबीस वर्ष की आयु के युवाओं में सोशल मीडिया की लत तेजी से बढ़ रही है जिससे चिंता, अवसाद, आत्मविश्वास में कमी और साइबरबुलिंग से उत्पन्न तनाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ता स्क्रीन टाइम पढ़ाई, उत्पादकता, नींद और सामाजिक रिश्तों को भी प्रभावित कर रहा है। बढ़ती मानसिक समस्याओं की तुलना में मनोचिकित्सकों और मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों की उपलब्धता अत्यंत कम है जिससे उपचार और जरूरत के बीच एक बड़ी खाई बन रही है।
भारत की मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए निर्णायक मोड़
देश में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के तेजी से बढ़ते बोझ को देखते हुए निमहांस-2 की स्थापना और अन्य संस्थानों के विस्तार को विशेषज्ञ अत्यंत महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। यह न केवल उपचार की पहुंच को आसान करेगा बल्कि मानसिक स्वास्थ्य शोध और शिक्षा को भी नई दिशा प्रदान करेगा। यह निर्णय भारत की मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक और प्रभावी परिवर्तन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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