भारत में बीबीसी के पूर्व संवाददाता और विश्वप्रसिद्ध पत्रकार सर मार्क टली का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। दशकों तक उनकी आवाज़ न केवल ब्रिटेन बल्कि पूरी दुनिया में बीबीसी श्रोताओं के लिए विश्वसनीय पत्रकारिता का पर्याय बनी रही। भारत में रहकर उन्होंने जिस संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ रिपोर्टिंग की, उसने उन्हें भारतीय दर्शकों के बीच विशेष स्थान दिलाया।
भारत से गहरा जुड़ाव और ज़मीनी पत्रकारिता
मार्क टली केवल भारत को कवर करने वाले विदेशी संवाददाता नहीं थे, बल्कि भारत को समझने वाले पत्रकार थे। गांवों से लेकर सत्ता के गलियारों तक, उनकी रिपोर्टिंग में भारतीय समाज की जटिलताएं, पीड़ा और संघर्ष स्पष्ट दिखाई देते थे। भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता को उन्होंने पश्चिमी दुनिया के सामने प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत किया।
ऐतिहासिक घटनाओं के प्रत्यक्ष साक्षी
अपने लंबे पत्रकारिता करियर में मार्क टली ने युद्ध, अकाल, दंगे, राजनीतिक हत्याएं और सामाजिक उथल-पुथल को करीब से देखा और दुनिया तक पहुंचाया। भोपाल गैस त्रासदी, ऑपरेशन ब्लू स्टार और पंजाब के अशांत दौर की उनकी रिपोर्टिंग आज भी संदर्भ के रूप में देखी जाती है। इन घटनाओं की रिपोर्टिंग में उन्होंने मानवीय पीड़ा को आंकड़ों से ऊपर रखा।
बाबरी विध्वंस की रिपोर्टिंग और जोखिम भरा अनुभव
1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान मार्क टली स्वयं घटनास्थल पर मौजूद थे। उस दौरान उग्र भीड़ ने उन्हें कई घंटों तक एक कमरे में बंद कर दिया था। बाद में एक स्थानीय अधिकारी और एक हिंदू पुजारी की मदद से वह सुरक्षित बाहर निकल पाए। यह घटना उनके साहस और ज़मीनी रिपोर्टिंग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्क टली के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह पत्रकारिता की एक प्रभावशाली आवाज़ थे। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और यहां के लोगों से उनका जुड़ाव उनके काम में साफ झलकता था और उनकी रिपोर्टिंग व विचारों ने सार्वजनिक विमर्श पर स्थायी प्रभाव छोड़ा है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना प्रकट की।
पत्रकारिता में छोड़ी अमिट छाप
मार्क टली की पत्रकारिता सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह समाज को समझने और समझाने का माध्यम थी। उन्होंने सत्ता, व्यवस्था और समाज—तीनों को आईना दिखाने का कार्य किया। निष्पक्षता, साहस और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान रही, जिसने उन्हें एक असाधारण पत्रकार बनाया।
एक युग का अंत, लेकिन विरासत जीवित
मार्क टली भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी रिपोर्टिंग, किताबें और विचार आने वाली पीढ़ियों के पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची पत्रकारिता सीमाओं से परे जाकर मानवीय सरोकारों को आवाज़ देती है।
Comments (0)