क़रीब 90 वर्षों से सत्ता के महत्वपूर्ण निर्णयों का केंद्र रहा साउथ ब्लॉक अब अपनी भूमिका नए प्रशासनिक ढांचे को सौंपने जा रहा है। शुक्रवार दोपहर प्रधानमंत्री कार्यालय नवनिर्मित सेवा तीर्थ में स्थानांतरित हो जाएगा। यह बदलाव सिर्फ स्थान का नहीं, बल्कि शासन की मूल भावना में परिवर्तन का संकेत है। सेवा तीर्थ रायसीना हिल से कुछ ही दूरी पर स्थित है और इसे आधुनिक प्रशासन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
पीएम मोदी की अंतिम कैबिनेट बैठक और सेवा तीर्थ का उद्घाटन
शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साउथ ब्लॉक में अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक करेंगे। इसके बाद केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों का काफिला सेवा तीर्थ की ओर बढ़ेगा, जहाँ नए प्रशासनिक परिसर का आधिकारिक उद्घाटन होगा। इस स्थानांतरण के साथ भारतीय शासन-तंत्र का केंद्रीय ढांचा एकीकृत और अधिक सक्षम व्यवस्था में बदल जाएगा।
साउथ ब्लॉक का गौरवशाली इतिहास और ऐतिहासिक कैबिनेट बैठकें
साउथ ब्लॉक में स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुई थी। 1931 में निर्मित यह इमारत ब्रिटिश शासन की संरचनात्मक भव्यता के साथ-साथ भारत के आधुनिक प्रशासन का प्रतीक रही है। 1947 में प्रधानमंत्री सचिवालय की स्थापना से शुरू हुई यह यात्रा लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में बड़े बदलावों से गुज़री, जब इसे विधिक मान्यता मिली। इंदिरा गांधी के समय में इसकी शक्ति और दायरा बढ़ा और 1977 में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री कार्यालय अर्थात् पीएमओ कर दिया गया।
सेवा तीर्थ में एकीकृत होगा शासन का सर्वोच्च ढांचा
सेवा तीर्थ केवल पीएमओ का नया पता नहीं है, बल्कि यह शासन की शीर्ष इकाइयों को एक ही परिसर में लाने का अभिनव प्रयास है। सेवा तीर्थ एक में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ दो में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ तीन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा एनएसए का कार्यालय होगा। यह व्यवस्था भारत के रणनीतिक ढांचे को अधिक संगठित और प्रभावी बनाएगी। पुराने ढांचे में संवेदनशील मामलों के लिए विभिन्न स्थानों पर समन्वय कठिन होता था, अब यह चुनौती काफी हद तक हल हो जाएगी। यहाँ भारत के ‘जेम्स बॉन्ड’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी बैठकर महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।
सेवा तीर्थ नाम के पीछे छिपा संदेश और भविष्य की दिशा
पहले इस परिसर को कार्यपालिका केंद्र कहा जाता था, लेकिन इसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है ताकि शासन के केंद्र में सत्ता नहीं बल्कि सेवा की भावना को स्थान मिले। यह नाम परिवर्तन उत्तरदायित्व-आधारित शासन की ओर बढ़ते भारत की सोच का प्रतिबिंब है। साथ ही यह बदलाव औपनिवेशिक ढांचे से आधुनिक, भारतीय प्रशासनिक पहचान की ओर स्वाभाविक परिवर्तन को भी दर्शाता है।
साउथ ब्लॉक का अगला अध्याय—युग युगीन भारत संग्रहालय
पीएमओ के पूरी तरह खाली होने के बाद ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ में बदल दिया जाएगा। यह कदम उस युग के अंत का प्रतीक होगा जब ब्रिटिश काल की इमारतें भारत की सत्ता का केंद्र थीं। नया संग्रहालय इस इतिहास को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के सामने रखेगा, जिससे सत्ता के इस परिवर्तन को सांस्कृतिक महत्व भी मिल सके।
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