वायु प्रदूषण को राष्ट्रीय संकट बताते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि देश में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता पर तत्काल संसद में व्यापक चर्चा हो और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि 2026 के केंद्रीय बजट में प्रदूषण नियंत्रण के लिए वास्तविक और पर्याप्त संसाधन होना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वायु प्रदूषण : पर्यावरण नहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य का प्रश्न
राहुल गांधी का कहना है कि वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा हमला है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु-वर्ग प्रभावित है और शहरों में रहने वाले परिवारों के बीच भय का माहौल लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि साफ हवा की मांग कोई विलासिता नहीं, बल्कि नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, जिसके लिए सरकार को जमीनी समाधान प्रस्तुत करने होंगे।
बजट में पर्याप्त संसाधनों की मांग और ठोस कार्ययोजना का आह्वान
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि बजट में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष प्रावधान और पर्याप्त धनराशि होना अनिवार्य है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि सिर्फ रिपोर्टें और बयानबाजी पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि वास्तविक परियोजनाओं, साफ ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और निगरानी तंत्र पर निवेश किए जाएँ। उनका कहना था कि सरकार को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाकर व्यापक राष्ट्रीय कार्ययोजना बनानी होगी।
दिल्ली और उत्तरी भारत में खतरनाक स्तर का AQI
दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली का AQI 318 तक दर्ज किया गया, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का संकेत देता है। राहुल गांधी ने कहा कि इस प्रदूषण का असर न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है, क्योंकि इससे कामकाजी क्षमता, उत्पादकता और श्रमिकों की आजीविका पर गहरी चोट पहुंच रही है।
सबसे ज्यादा प्रभावित कमजोर तबके : बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों पर भारी बोझ
अपने संदेश में गांधी ने उल्लेख किया कि वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा भार बच्चों, वृद्धजनों, दिहाड़ी मजदूरों और निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों पर पड़ता है। लगातार प्रदूषित हवा के कारण दमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नुकसान पहुँचा रहा है, जिससे देश के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
‘आवाज़ भारत की’ मंच के ज़रिये नागरिकों की भावनाओं को संसद तक ले जाने का वादा
राहुल गांधी ने अपने जन-संपर्क मंच ‘आवाज़ भारत की’ पर नागरिकों से वायु प्रदूषण पर अपनी कहानियाँ और अनुभव साझा करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों लाखों संदेशों में लोगों ने अपने भय, स्वास्थ्य संकट और जीवन की कठिनाइयों को व्यक्त किया है। गांधी ने आश्वासन दिया कि जनता की आवाज़ को वे संसद तक ले जाएंगे, ताकि वायु प्रदूषण पर ठोस राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठ सकें।
सर्दियों के बाद मुद्दे को भुलाया नहीं जा सकता : वर्षभर कार्रवाई की जरूरत
उन्होंने कहा कि प्रदूषण को ‘सर्दियों का मुद्दा’ मानकर अनदेखा करना देशहित में नहीं है। यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण—तीनों पर एक स्थायी खतरा है। इसलिए जरूरी है कि सरकार पूरे वर्ष कारगर कदम उठाए, शहरी नियोजन को मजबूत करे और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाए।
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