भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता में सरला माहेश्वरी वह नाम थीं जिन्होंने दूरदर्शन के स्वर्णकाल को अपनी आवाज, अभिव्यक्ति और गरिमामय प्रस्तुति से परिभाषित किया। उस दौर में जब समाचार का मतलब सौम्यता, सटीकता और विश्वसनीयता होता था, सरला माहेश्वरी दर्शकों के बीच भरोसे की प्रतिमूर्ति बन चुकी थीं। उनके निधन ने टीवी पत्रकारिता को गहरी रिक्तता से भर दिया है।
परिवार द्वारा अंतिम संस्कार की घोषणा
परिवार ने एक पोस्ट जारी कर जानकारी दी कि सरला माहेश्वरी का अंतिम संस्कार 12 फरवरी को शाम चार बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया जाएगा। उनके चाहने वालों के लिए यह खबर अत्यंत दुखद है, क्योंकि वह केवल एक न्यूज़रीडर नहीं बल्कि कई पीढ़ियों की प्रेरणा थीं, जिन्होंने समाचार-पाठन को एक गरिमापूर्ण कला का रूप दिया।
खबर पढ़ने की शैली जिसने दर्शकों को बाँधे रखा
सरला माहेश्वरी की वाणी में जिस सहजता, शांति और अनुशासन का मेल था, वह आज की तेज़-तर्रार न्यूज़ स्क्रीन पर कम ही दिखाई देता है। उनकी आवाज़ में ऐसा गाम्भीर्य होता था कि दर्शक स्वाभाविक रूप से उनसे जुड़ जाते थे। उन्होंने समाचार पढ़ने को सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि सटीकता और संस्कृति के साथ निभाई जाने वाली गंभीर ज़िम्मेदारी बनाया।
सोशल मीडिया पर उमड़ा श्रद्धांजलि का सैलाब
उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर भावनाओं की लहर दौड़ गई। अनेक पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और आम दर्शकों ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सरला माहेश्वरी के साथ एक ऐसा दौर समाप्त हो गया है जब न्यूज़ स्टूडियो में मर्यादा, स्पष्टता और विश्वसनीयता सर्वोपरि होती थी। लोगों ने याद किया कि उनके समय में समाचार का अर्थ ड्रामा नहीं, बल्कि तथ्यों की स्पष्ट और शांत प्रस्तुति होता था।
भारतीय पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति
दूरदर्शन के सुनहरे वर्षों को जिन कुछ नामों ने अमर किया, उनमें सरला माहेश्वरी प्रमुख थीं। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, वह आने वाले समय में भी भर पाना कठिन होगा। उनकी शालीनता, पेशेवर दक्षता और अनुकरणीय व्यक्तित्व भारतीय मीडिया जगत के लिए सदैव प्रेरणा बनकर रहेगा।
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