गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को सहारा समूह से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत मिली है। शीर्ष अदालत ने सहारा समूह के खिलाफ चल रही जांच को जारी रखने की अनुमति दे दी है। इस महत्वपूर्ण कानूनी सफलता के लिए SFIO के अभियोजक नितिन अग्निहोत्री को सर्वश्रेष्ठ अधिकारी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान SFIO के निदेशक केशव चंद्रा (IAS) द्वारा प्रदान किया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट का स्थगन आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द
यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सहारा समूह प्रकरण में प्रारंभिक चरण में लगाए गए अंतरिम स्थगन आदेश से जुड़ा था। SFIO की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि यह आदेश कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के विपरीत है। भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा, जबकि SFIO की ओर से अभियोजक नितिन अग्निहोत्री ने प्रभावी पैरवी की।
SFIO को जांच जारी रखने की मिली अनुमति
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने SFIO की दलीलों को स्वीकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के स्थगन आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही सहारा समूह के खिलाफ जांच को आगे बढ़ाने की हरी झंडी दे दी गई।
लाखों निवेशकों को न्याय की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देशभर के उन लाखों निवेशकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनकी गाढ़ी कमाई वर्षों से सहारा समूह और उससे जुड़ी सहकारी संस्थाओं में फंसी हुई है। इससे पहले सहारा समूह को SEBI के समक्ष 24 हजार करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।इसके अलावा SFIO ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की पत्नी स्वप्ना रॉय के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर भी जारी किया था, जिसके तहत उन्हें देश छोड़ने से रोका गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला करीब एक लाख करोड़ रुपये के उस कथित आर्थिक नेटवर्क से जुड़ा है, जिसे वर्षों तक पोंजी योजनाओं के जरिए खड़ा किया गया। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि आर्थिक अपराधों में कानून से ऊपर कोई नहीं।
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