संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद विरोधी निगरानी टीम द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लाल किले पर हुआ धमाका किसी सामान्य आतंकी घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि इसके पीछे जैश-ए-मोहम्मद का सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय था। यूएन ने एक सदस्य देश के हवाले से बताया है कि इस आतंकी संगठन ने 9 नवंबर को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुए हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की है, जिसमें 15 लोगों की जान गई थी। यह स्वीकारोक्ति भारत के वर्षों से चल रहे आरोपों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान करती है और पाकिस्तान पर बढ़ते वैशिक अविश्वास को और मजबूत करती है।
मसूद अजहर की नई चाल: महिला आतंकी विंग का गठन
जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियों में खतरनाक बदलाव उस समय उजागर हुआ जब रिपोर्ट ने बताया कि मसूद अजहर ने ‘जमात-उल-मुमिनात’ नामक महिला आतंकी विंग की स्थापना की है। यह आतंकी ढांचे का रणनीतिक विस्तार माना जा रहा है। इस विंग का उद्देश्य नए तरीकों से भर्ती बढ़ाना और संवेदनशील लक्ष्य तैयार करना बताया गया है। महिला आधार वाले ऐसे संगठन आतंकवाद की परंपरागत समझ को चुनौती देते हैं और सुरक्षा एजेंसियों के लिए नए खतरे पैदा करते हैं।
दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव
यूएन की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी गतिविधियों को सीमित दिखाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन उसकी रणनीति में लगातार अनुकूलन और पुनर्गठन के संकेत मिल रहे हैं। आतंकवाद-विरोधी वैश्विक प्रयासों के बावजूद ऐसे समूह प्रतीकात्मक और बड़े असर वाले हमलों की योजनाओं पर काम कर रहे हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इससे साफ है कि दक्षिण एशिया अभी भी आतंकवादी गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई में रुकावटें
संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम ने यह भी रेखांकित किया कि सदस्य देशों के बीच खुफिया मूल्यांकन को लेकर अंतर मौजूद है। कुछ देश जैश-ए-मोहम्मद को सक्रिय, खतरनाक और परिचालन स्तर पर सक्षम मानते हैं, जबकि कुछ अन्य इसे निष्क्रिय बताने की दलील देते हैं। यह असहमति अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी कार्रवाई को कमजोर करती है और आतंकियों को नए अवसर प्रदान करती है। वैश्विक सहमति की कमी के चलते ठोस कदमों पर सहमति बनना मुश्किल होता जा रहा है।
पाकिस्तान पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
यूएन की रिपोर्ट का सबसे बड़ा प्रभाव पाकिस्तान पर देखा जा सकता है, जहां इस आतंकी संगठन को लंबे समय से पनाह और समर्थन मिलता रहा है। लाल किले धमाके की अंतरराष्ट्रीय पुष्टि पाकिस्तान के लिए एक और कूटनीतिक झटका है। भारत ने हमेशा कहा है कि सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क ही देश में अस्थिरता फैलाते हैं और यह रिपोर्ट भारत के उस दावे को मजबूत करती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर वैश्विक दबाव और बढ़ने की आशंका है।
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