केंद्र सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 3.03 करोड़ टन तय किया है। यह निर्णय खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के खाद्य सचिवों ने भाग लिया। बैठक में आने वाले विपणन सत्र की तैयारियों, खरीद व्यवस्था और भंडारण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों से उचित मात्रा में गेहूं की खरीद हो और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहे।
अप्रैल से जून के बीच होती है अधिकांश खरीद
भारत में गेहूं की सरकारी खरीद मुख्य रूप से अप्रैल से जून के बीच की जाती है। इसी अवधि में किसान अपनी फसल को मंडियों में लेकर आते हैं और सरकारी एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करती हैं। हालांकि कुछ अन्य रबी फसलों की खरीद मार्च तक भी जारी रहती है। इस व्यवस्थित खरीद प्रक्रिया के माध्यम से सरकार न केवल किसानों को उचित मूल्य उपलब्ध कराती है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाए रखती है।
अन्य अनाजों की खरीद का भी अनुमान
सरकार ने गेहूं के साथ-साथ अन्य अनाजों की खरीद को लेकर भी अनुमान जारी किया है। वर्ष 2025-26 की रबी फसल के लिए धान की खरीद चावल के रूप में लगभग 76 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राज्यों द्वारा श्रीअन्न के रूप में पहचाने जाने वाले मोटे अनाजों की खरीद भी बढ़ने की संभावना है। अनुमान के अनुसार करीब 7,79,000 टन मोटे अनाजों की खरीद की जा सकती है, जिससे पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रिकॉर्ड क्षेत्र में बुवाई से बढ़ेगा उत्पादन
कृषि क्षेत्र से प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इस बार देश में लगभग 3.34 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई है, जो एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है। इसके साथ ही मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। अनुमान है कि इस वर्ष गेहूं का कुल उत्पादन पिछले वर्ष के रिकॉर्ड 11.79 करोड़ टन से आगे बढ़कर लगभग 12 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
भंडार में पर्याप्त गेहूं उपलब्ध
भारतीय खाद्य निगम के पास एक अप्रैल 2026 तक गेहूं का स्टॉक लगभग 1.82 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है। यह भंडार घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि मौजूदा भंडार और नई खरीद मिलकर देश में खाद्यान्न आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद करेंगे। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत खाद्यान्न उपलब्ध कराने में भी आसानी होगी।
निर्यात पर लगे प्रतिबंध में दी गई राहत
हाल ही में सरकार ने गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात पर लगे चार वर्ष पुराने प्रतिबंध को हटाने का निर्णय भी लिया है। फरवरी में लिए गए इस फैसले के तहत शुरुआती चरण में 25 लाख टन गेहूं और पांच लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है। सरकार का मानना है कि घरेलू भंडार और उत्पादन की स्थिति मजबूत होने के कारण सीमित मात्रा में निर्यात से किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देश की भागीदारी बढ़ेगी।
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