मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात करीब 8,000 जूनियर डॉक्टर (जूडा) सोमवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे चुके हैं। स्टाइपेंड संशोधन लागू नहीं होने से नाराज डॉक्टरों ने रविवार को प्रदेशभर में ‘जस्टिस मार्च’ निकाला और सरकार को अंतिम चेतावनी दी। डॉक्टरों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा और ऑपरेशन थिएटर में केवल गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा। इस हड़ताल का असर हर्निया, ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट और गॉल ब्लैडर जैसे नियमित ऑपरेशनों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।
जेडीए अध्यक्ष का बयान
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यदि सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आदेश लागू कर एरियर भुगतान होते ही आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा।
जीएमसी में ‘जस्टिस मार्च’ और विरोध प्रदर्शन
रविवार दोपहर जीएमसी में जूनियर डॉक्टर एडमिन ब्लॉक के सामने एकत्र हुए और रैली निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। तीन दिन से रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे केवल शासन के जारी आदेश को लागू कराने की मांग कर रहे हैं।
स्टाइपेंड संशोधन का विलंब
मध्य प्रदेश शासन के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार रेजिडेंट डॉक्टरों का CPI आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन 10 महीने बाद भी इसे लागू नहीं किया गया और एरियर भुगतान नहीं हुआ। जेडीए का दावा है कि देरी से निजी मेडिकल कॉलेजों को लगभग 12 करोड़ रुपए का लाभ हुआ है।
Comments (0)