देश में दो पायलट्स की हार्ट अटैक से मौत के बाद कॉमर्शियल पायलट्स की थकान और उनके ड्यूटी घंटों को लेकर बहस तेज हो गई है। पायलट्स का कहना है कि लगातार बढ़ते काम के दबाव और अपर्याप्त आराम से उनकी सेहत और फ्लाइट सेफ्टी दोनों प्रभावित हो रही हैं।
DGCA से सख्त नियम लागू करने की मांग
Airline Pilots' Association of India ने DGCA को पत्र लिखकर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि एयरलाइंस को बार-बार दी जा रही छूट सुरक्षा मानकों के साथ समझौता है।
दो मौतों ने बढ़ाई चिंता
- एसोसिएशन के अनुसार
- 29 अप्रैल को बाली में Air India के एक पायलट की हार्ट अटैक से मौत
- 30 अप्रैल को बेंगलुरु में Akasa Air के पायलट का निधन
- दोनों ही मामलों में पायलट्स की उम्र 45 साल से कम बताई जा रही है, जिससे काम के दबाव और थकान पर सवाल खड़े हो गए हैं।
48 घंटे साप्ताहिक आराम जरूरी, पर पालन नहीं
- पायलट्स के लिए हर हफ्ते 48 घंटे का रेस्ट अनिवार्य है, लेकिन आरोप है कि एयरलाइंस ऑपरेशनल कारणों का हवाला देकर इस नियम का पालन नहीं करतीं।
- एसोसिएशन ने इन अस्थायी छूटों को खत्म करने के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय करने की मांग की है।
एयरलाइंस को मिल रही ‘विशेष राहत’
- हाल के समय में एयर इंडिया और इंडिगो को कुछ मामलों में नियमों से छूट दी गई।
- लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए समय सीमा में राहत
- फ्लाइट रद्द होने के बाद अतिरिक्त मोहलत
- पायलट्स का कहना है कि यह ‘सिलेक्टिव’ राहत सुरक्षा के बजाय व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता देती है।
थकान रिपोर्टिंग पर सवाल
- RTI आंकड़ों के मुताबिक, एयरलाइंस थकान से जुड़ी रिपोर्ट्स को बहुत कम स्वीकार करती हैं।
- पायलट्स का आरोप है कि कंपनियां ऐसी रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करती हैं।
- एसोसिएशन ने तिमाही थकान डेटा सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।
पायलट्स की कमी बढ़ा रही दबाव
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 25,000 लाइसेंसधारी पायलट्स हैं, जबकि आने वाले समय में 30,000 की जरूरत होगी।
- एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस कमी को पूरा करने के लिए मौजूदा पायलट्स से ज्यादा काम लिया जा रहा है, जो सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है।