सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। इस फैसले को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह धारणा गलत है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी किसी खास पार्टी के खिलाफ काम करेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी सोच ही समस्या की जड़ है और राजनीतिक दलों को सरकारी कर्मचारियों पर भरोसा करना चाहिए।
कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने दलील देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में विसंगतियों की आशंका जताई गई है और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की मांग की गई है, जो राज्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।
जस्टिस बागची की टिप्पणी
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि कोई अधिकारी केंद्र सरकार का प्रतिनिधि है या नहीं।
काउंटिंग के दौरान कई स्तर के अधिकारी मौजूद रहते हैं
काउंटिंग एजेंट, सुपरवाइजर और माइक्रो ऑब्जर्वर प्रक्रिया की निगरानी करते हैं
उन्होंने यह भी कहा कि केवल एक वर्ग के अधिकारियों की नियुक्ति को नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह याचिका Calcutta High Court के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें टीएमसी की अपील खारिज कर दी गई थी।
टीएमसी ने पश्चिम बंगाल चुनावों में वोटों की गिनती के दौरान केवल केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को पर्यवेक्षक बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में फिलहाल कोई हस्तक्षेप नहीं होगा और चुनाव प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर कोर्ट ने भरोसा जताया है।