हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता माना गया है। वहीं भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता और भगवान शिव संहार के देवता माने जाते हैं। त्रिदेवों में ब्रह्मा जी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि सृष्टि की रचना का कार्य उन्हीं से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद भारत में उनके मंदिर बहुत कम देखने को मिलते हैं, जो लोगों के मन में जिज्ञासा उत्पन्न करता है।
पुष्कर में हुआ था महायज्ञ का आयोजन
पौराणिक ग्रंथ पद्म पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी ने सृष्टि के कल्याण के लिए एक विशाल महायज्ञ करने का निर्णय लिया। इस यज्ञ का आयोजन राजस्थान के पवित्र तीर्थ स्थल पुष्कर में किया गया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी यज्ञ को पूर्ण और फलदायी बनाने के लिए पत्नी का साथ होना अनिवार्य माना जाता है।
समय निकलता देख ब्रह्मा जी ने किया दूसरा विवाह
कथा के अनुसार जब महायज्ञ का शुभ मुहूर्त निकट आया, तब ब्रह्मा जी की पत्नी माता सावित्री वहां उपस्थित नहीं थीं। यज्ञ का समय निकलता जा रहा था, इसलिए ब्रह्मा जी ने वहां उपस्थित एक कन्या गायत्री से विवाह कर लिया और उनके साथ यज्ञ प्रारंभ कर दिया। यह घटना बाद में बड़े विवाद का कारण बन गई।
सावित्री के क्रोध से मिला श्राप
जब माता सावित्री यज्ञ स्थल पर पहुंचीं, तो उन्होंने देखा कि उनके स्थान पर कोई अन्य स्त्री ब्रह्मा जी के साथ बैठी हुई है। यह देखकर वह अत्यंत क्रोधित हो गईं। क्रोध में उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि भले ही वे सृष्टि के रचयिता हैं, लेकिन पूरे संसार में उनकी पूजा व्यापक रूप से नहीं होगी।
देवताओं की प्रार्थना के बाद मिला आंशिक समाधान
जब देवताओं ने माता सावित्री से शांत होने की प्रार्थना की, तब उन्होंने अपने श्राप में थोड़ी नरमी लाते हुए कहा कि पृथ्वी पर केवल पुष्कर ही वह स्थान होगा जहां ब्रह्मा जी की विधिवत पूजा की जाएगी। इसी कारण भारत में ब्रह्मा जी का प्रमुख मंदिर पुष्कर में स्थापित है।
आज भी दिखाई देता है श्राप का प्रभाव
आज भी इस पौराणिक कथा का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। भारत में जहां भगवान विष्णु और भगवान शिव के हजारों मंदिर मिलते हैं, वहीं ब्रह्मा जी के मंदिर बहुत कम देखने को मिलते हैं। पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
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