राजस्थान के कोटा में आयोजित निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav शामिल हुए। ग्राम रींछी में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने विवाह संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि दो परिवारों को जोड़ने वाला पवित्र बंधन है। उन्होंने बेटियों को ईश्वर का स्वरूप बताते हुए कहा कि उनके माध्यम से समाज में रिश्तों की नई शुरुआत होती है।
सनातन परंपरा और संस्कारों का महत्व
सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म के 16 संस्कारों में विवाह संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह जीवन को नई दिशा देता है और व्यक्ति को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ता है। उन्होंने भगवान Krishna के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलना ही सच्चा जीवन है।

मंदिर विकास और सामाजिक सहयोग की घोषणा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामगंज मंडी के पास स्थित एक प्राचीन मंदिर के विकास में सरकार की ओर से सहयोग देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास न केवल आस्था को मजबूत करता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है। इस अवसर पर Om Birla और Madan Dilawar भी मौजूद रहे।
सादगी से विवाह का संदेश
सीएम डॉ. यादव ने समाज से अपील की कि शादी-विवाह में अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सादगी से विवाह करने से आर्थिक बोझ कम होता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बेटे का विवाह भी सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही कराया था।

कुंभ और विकास परियोजनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए आमंत्रित किया। साथ ही उन्होंने पार्वती-काली सिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोलेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।