भारतीय उपासना पद्धति में फूलों का स्थान अत्यंत पवित्र माना गया है। यह केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि देवत्व को प्रसन्न करने का साधन भी है। हर देवी-देवता की एक विशिष्ट ऊर्जा होती है, जिसे विशेष रंग और विशेष सुगंध वाले पुष्प सहजता से आकर्षित करते हैं। शास्त्रों में वर्णित इन नियमों का पालन करने पर साधक के जीवन में शांति, समृद्धि और सौभाग्य के योग प्रबल हो जाते हैं। सही फूल का चयन न केवल आस्था की अभिव्यक्ति है, बल्कि कर्म और फल के बीच एक दिव्य सेतु का निर्माण भी करता है।
भगवान गणेश: लाल पुष्प और दूर्वा से तुरंत कृपा
विघ्नों का नाश करने वाले श्री गणेश का प्रिय रंग लाल है। पूजा में लाल अड़हुल (गुड़हल), लाल गुलाब या कनेर चढ़ाने से मनोकामनाएं बाधा रहित सफल होती हैं। गणेश जी की उपासना दूर्वा के बिना अपूर्ण मानी जाती है। दूर्वा प्रिय होने का कारण यह है कि यह पवित्रता, दीर्घायु और शांति का प्रतीक है। नियमित रूप से लाल पुष्प और दूर्वा अर्पित करने से परिवार में स्थिरता और कार्यों में सफलता के योग बढ़ते हैं।
भगवान शिव: सरल, सादगीपूर्ण और निष्कलुष पुष्प
भगवान भोलेनाथ को आडंबर पसंद नहीं। वे सरल, गंधहीन और जंगली पुष्पों से प्रसन्न होते हैं। धतूरा, आक, बिल्वपत्र, सफेद कनेर और बेली के फूल शिव पूजा में विशेष फलदायी माने गए हैं। यह पुष्प तप, वैराग्य और शुद्धता का प्रतीक हैं। शिव को इन फूलों का अर्पण मानसिक शांति, कष्टों का नाश और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। विशेष रूप से सावन में इनका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
भगवान विष्णु: पीले पुष्प और तुलसी — सृष्टि के पालनकर्ता की पसंद
श्रीहरि विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, क्योंकि यह ज्ञान, शांति और सौम्यता का प्रतीक है। विष्णु पूजा में पीले गेंदे, कमल, चंपा और पीला गुलाब शुभ फल देते हैं। लेकिन ध्यान रहे—विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी है। तुलसी को उनके श्रीअंग का हिस्सा माना गया है। पीले पुष्पों और तुलसी के संयोजन से मन की स्थिरता, सौभाग्य और सकारात्मकता तेजी से बढ़ती है।
माता लक्ष्मी: कमल और गुलाबी पुष्प से आती है समृद्धि
समृद्धि की अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी को सबसे अधिक प्रिय है कमल। कमल शुद्धता, सौभाग्य और दिव्य ऐश्वर्य का प्रतीक है। लाल कमल, गुलाबी कमल या गुलाबी गुलाब चढ़ाने से आर्थिक परिस्थितियों में सुधार आता है। विशेषकर शुक्रवार और दीपावली पर कमल का अर्पण अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि कमल चढ़ाने से दरिद्रता दूर होती है और धन के स्रोत स्वतः खुल जाते हैं।
हनुमान जी: लाल गेंदा और सुगंधित पुष्प से मिलती है शक्ति
बल, उत्साह और निर्भीकता के प्रतीक हनुमान जी को लाल गेंदा अत्यंत प्रिय है। इसके साथ ही चमेली, केवड़ा और गुलर के फूल भी बजरंगबलि को प्रसन्न करते हैं। लाल गेंदा साहस का प्रतीक है, जबकि चमेली का तेल और पुष्प हनुमान जी की आराधना में ऊर्जा और तेज का संचार करते हैं। इन फूलों का अर्पण शत्रु बाधाओं को दूर करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
माता दुर्गा: लाल गुड़हल और लाल गुलाब से प्रसन्न होती हैं मां शक्ति
शक्ति और साहस की देवी मां दुर्गा को तेजस्वी लाल रंग का फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लाल गुड़हल , लाल गुलाब और कनेर की लाल प्रजाति मां को अत्यंत प्रिय है। नवरात्रि के दौरान लाल फूलों से की गई पूजा से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां दुर्गा का लाल रंग ऊर्जा, संकल्प और विजय का प्रतीक है।
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