माघी पूर्णिमा इस वर्ष अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोगों के साथ आ रही है। सात पावन योग, पुष्य नक्षत्र और सूर्य–चंद्रमा की विशेष स्थिति इसे वर्ष का सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक अवसर बना रही है। श्रद्धालु इन दिव्य संयोगों में स्नान, दान और पूजा करके अनेक गुना पुण्य प्राप्त करेंगे। इस बार 1 फरवरी की भोर से 2 फरवरी की भोर तक यह दिव्यता बनी रहेगी, जिससे यह पूर्णिमा विशिष्ट ज्योतिषीय प्रभावों से युक्त मानी जा रही है।
पूर्णिमा: चंद्रमा की प्रिय तिथि और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
हिंदू पंचांग में पूर्णिमा चंद्रमा की सर्वाधिक प्रभावशाली तिथि मानी जाती है। माघी पूर्णिमा आध्यात्मिक शुद्धिकरण, मनोबल वृद्धि और पुण्य संचय का उत्तम समय है। इस तिथि पर की गई साधना और स्नान को पापों का क्षालन करने वाला बताया गया है। महंत एवं वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य जितेंद्र मोहन पूरी के अनुसार इस वर्ष पूर्णिमा 1 फरवरी प्रातः 5:19 से 2 फरवरी प्रातः 3:46 तक रहेगी और उदय तिथि के अनुसार स्नान 1 फरवरी को सर्वश्रेष्ठ फलदायी रहेगा।
सात शुभ योगों का दिव्य संयोग
इस बार माघी पूर्णिमा पर सात अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं—विशेष प्रीति योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, रवि आयुष्मान योग, श्रीवत्स योग और उत्तम योग। ये योग किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, दान, जप, साधना और हवन को कई गुना प्रभावशाली बना देते हैं। इन योगों का सामूहिक प्रभाव जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और मानसिक संतुलन प्रदान करता है।
पुष्य नक्षत्र का संगम: अतुलनीय आध्यात्मिक शक्ति
पुष्य नक्षत्र देवताओं का नक्षत्र माना जाता है, और इसका माघी पूर्णिमा के साथ आ जाना अत्यंत दुर्लभ है। इस संयोजन में किया गया स्नान विशेष फल देता है और दान को अनंत काल तक पुण्य देने वाला माना गया है। मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र में किए गए धार्मिक कर्म देवताओं द्वारा प्रत्यक्ष स्वीकृत होते हैं, जिससे व्यक्ति को तेज, सौभाग्य और शांति प्राप्त होती है।
स्नान, जप और दान के तीन विशेष मुहूर्त
इस वर्ष तीन प्रमुख मुहूर्त आध्यात्मिक साधना को अत्यंत फलदायी बनाते हैं:
ब्रह्म मुहूर्त – 5:24 से 6:18, जब प्राकृतिक और दिव्य ऊर्जा सर्वाधिक सक्रिय रहती है।
रवि-पुष्य योग – 7:09 से रात 11:58 तक, जो धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य का योग माना जाता है।
मीन लग्न – 8:46 से 10:15 बजे तक, जो साधना और पूजा के लिए आदर्श समय माना गया है।
इन मुहूर्तों में स्नान, मंत्र-जप और दान को कई गुना पुण्य प्राप्त होता है।
गंगा-स्नान, सूर्य-आराधना और दान की परंपरा
माघी पूर्णिमा पर गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र जलाशय में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य देना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। सूर्य-आराधना से जीवन में ऊर्जा, तेज, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास बढ़ता है। इस दिन वस्त्र, अनाज, फल, पीले पुष्प, मिष्ठान और कम्बल दान करना शुभ माना गया है। भगवान विष्णु की विशेष पूजा कर पीले नैवेद्य अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Comments (0)