वसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति मानो नवयौवना बन जाती है। वृक्षों पर नई कोपलें फूट पड़ती हैं, खेतों में सरसों स्वर्णिम आभा बिखेरती है और आम्र-मंजरियों की सुगंध वातावरण को मोहक बना देती है। कोयल की कूक और भौरों की गुनगुनाहट यह संकेत देती है कि प्रकृति सृजन के चरम पर है। सूर्य की कोमल किरणें न तो शरीर को थकाती हैं और न ही मन को उदास करती हैं, बल्कि ऊर्जा और संतुलन प्रदान करती हैं।
लोकजीवन और सांस्कृतिक चेतना में बसंत
भारतीय समाज में वसंत केवल ऋतु नहीं, बल्कि उत्सवों की श्रृंखला है। वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा और होली जैसे पर्व इसी काल में मनाए जाते हैं, जो ज्ञान, रंग और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। पीले वस्त्र, पतंगबाजी और सामूहिक उल्लास लोकजीवन में आशा और सकारात्मकता का संचार करते हैं। ग्रामीण भारत से लेकर शहरी समाज तक, बसंत जनमानस को जोड़ने वाली सांस्कृतिक कड़ी बन जाता है।
साहित्य, कला और संगीत में ऋतुराज
भारतीय साहित्य और कला में बसंत सदा से प्रेरणा का स्रोत रहा है। कालिदास, विद्यापति और जयदेव जैसे कवियों ने बसंत को प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक माना। शास्त्रीय संगीत में बसंत राग और चित्रकला में पीले-हरे रंगों की प्रधानता इसी ऋतु की अभिव्यक्ति है। यह ऋतु कलाकार की कल्पना को पंख देती है और सृजनशीलता को नई ऊँचाइयों तक ले जाती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से वसंत का महत्व
वसंत बाह्य ही नहीं, आंतरिक जागरण का भी संकेतक है। जैसे प्रकृति में नई कोंपलें जन्म लेती हैं, वैसे ही साधक के भीतर चेतना का नवोदय होता है। यह समय साधना, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए अनुकूल माना गया है। मानसिक जड़ता टूटती है और व्यक्ति आत्मिक संतुलन की ओर अग्रसर होता है, जिससे जीवन में स्पष्टता और शांति का अनुभव होता है।
स्वास्थ्य और आयुर्वेद में वसंत ऋतु
आयुर्वेद के अनुसार वसंत ऋतु शरीर के शोधन और संतुलन का काल है। इस समय कफ दोष सक्रिय होता है, अतः हल्का, सुपाच्य और सात्त्विक आहार ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। नियमित व्यायाम, प्राणायाम और प्रकृति के समीप समय बिताना शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है। बसंत स्वस्थ जीवनशैली की ओर लौटने का स्वाभाविक अवसर प्रदान करता है।
जीवन-दर्शन के रूप में बसंत
समग्र रूप में वसंत जीवन के शाश्वत सत्य को उद्घाटित करता है कि हर शीत के बाद उष्मा और हर निराशा के बाद आशा आती है। यह ऋतु सिखाती है कि परिवर्तन ही जीवन का मूल है और हर अंत एक नए आरंभ का द्वार खोलता है। ऋतुराज वसंत हमें उल्लास, संतुलन और सृजनशीलता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
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