हिंदू मान्यता में त्रयोदशी तिथि सदैव शिव कृपा का विशेष अवसर मानी जाती है। जब यही तिथि शनिवार को आती है, तब यह शनि प्रदोष बन जाती है, जिसका प्रभाव साधारण प्रदोष से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है। कहा जाता है कि इस दिन महादेव विशेष रूप से प्रसन्न होकर साधक के जीवन से शनि दोष, बाधाएं और ग्रह पीड़ा को दूर करते हैं। महाशिवरात्रि से पहले पड़ने वाला यह प्रदोष व्रत आध्यात्मिक उत्थान और आशीर्वाद प्राप्ति का महत्वपूर्ण मार्ग खोल देता है।
फाल्गुन मास में कब पड़ता है शनि प्रदोष व्रत
फाल्गुन मास महाशिवरात्रि ऊर्जा का महीना माना जाता है और इस दौरान आने वाला शनि प्रदोष व्रत अत्यंत पुण्यदायी होता है। इस दिन की पूजा के माध्यम से साधक महादेव के साथ-साथ शनि देवता का आशीर्वाद भी प्राप्त करता है, जिससे ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं। शनि की कुदृष्टि से प्रभावित लोग इस व्रत से विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
प्रदोष काल क्यों माना जाता है सर्वश्रेष्ठ
प्रदोष काल, जो सूर्यास्त और रात्रि के मध्य का पवित्र संधिकाल माना गया है, शिव उपासना के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। मान्यता है कि इसी समय महादेव अपने भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। शनि प्रदोष व्रत की पूजा इस विशिष्ट काल में करने से साधक को वह पुण्य प्राप्त होता है, जो साधारण व्रतों में दुर्लभ है। इस अवधि की ऊर्जा अत्यंत सूक्ष्म और शक्तिशाली मानी जाती है।
शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
व्रत वाले दिन साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और ध्यान के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए। शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखने के बाद स्वच्छ तथा उजले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूरे दिन शिव चिंतन करते हुए अपने कर्मों को शांत मन से पूरा करना चाहिए। प्रदोष काल आने पर घर या मंदिर में शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र, भस्म, भांग और रुद्राक्ष अर्पित करके विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। यदि संभव हो तो रुद्राभिषेक अवश्य करें और रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का श्रद्धाभाव से जप करें। अंत में शिव आरती और प्रसाद वितरण के साथ व्रत संपन्न होता है।
शनि दोष से मुक्ति और कल्याण का मार्ग
शनि प्रदोष व्रत न केवल शनि दोष कम करता है, बल्कि जीवन में स्थिरता, स्वास्थ्य, धन और शांति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह व्रत साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है और उसकी आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है। महाशिवरात्रि के निकट आने पर इस व्रत का प्रभाव कई गुना अधिक होकर जीवन के कठिन दौर में भी राहत प्रदान करता है।
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