नई दिल्ली: आश्विन मास की अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन हो रहा है और इसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा। आज सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनका श्राद्ध किसी तिथि पर छूट गया हो। इसके बाद प्रतिपदा तिथि से मां दुर्गा की आराधना के नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत होगी। पंचांग के अनुसार, अमावस्या के दिन हस्त और चित्रा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। साथ ही इंद्र और वैधृति योग तथा चतुष्पाद, नाग और किंस्तुघ्न करण का संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि
दिए गए पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि अगले दिन मान्य होने के कारण 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ माना गया है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाएगी। धार्मिक परंपरा में घटस्थापना को नवरात्रि पूजा की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
Shardiya Navratri 2026 घटस्थापना मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के लिए कुल करीब 3 घंटे 52 मिनट का मुहूर्त बताया गया है।
घटस्थापना का पहला मुहूर्त:
सुबह 6:19 बजे से 10:52 बजे तक
इसके अलावा अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।
अभिजित मुहूर्त:
दोपहर 11:44 बजे से 12:31 बजे तक
पूजा की परंपरा के अनुसार, भक्त इस दौरान शुभ संकल्प लेकर कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू कर सकते हैं।
शारदीय नवरात्रि 2026 की पूरी तिथि
| तारीख | नवरात्रि |
|---|---|
| 11 अक्टूबर 2026 | पहला नवरात्र |
| 12 अक्टूबर 2026 | दूसरा नवरात्र |
| 13 अक्टूबर 2026 | तीसरा नवरात्र |
| 14 अक्टूबर 2026 | चौथा नवरात्र |
| 15 अक्टूबर 2026 | पांचवां नवरात्र |
| 16 अक्टूबर 2026 | छठा नवरात्र |
| 17-18 अक्टूबर 2026 | सातवां नवरात्र |
| 19 अक्टूबर 2026 | महाअष्टमी और महानवमी |
| 20 अक्टूबर 2026 | दशहरा/विजयादशमी |
नवरात्रि के बाद दशहरा
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के बाद 20 अक्टूबर 2026 को दशहरा यानी विजयादशमी मनाई जाएगी। धार्मिक परंपरा में विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।