Lucknow | उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पितृ पक्ष के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम एक पाती लिखकर पूर्वजों के प्रति सम्मान, बुजुर्गों के आदर और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने पितृ पक्ष को अतीत से भविष्य को जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि बताते हुए कहा कि पिछली पीढ़ियों ने समाज और परिवार को जो दिया है, उसे सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों को उससे अधिक समृद्ध विरासत सौंपना हमारा दायित्व है। इस वर्ष पितृ पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक है। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।

पितृ पक्ष पूर्वजों के तप और त्याग को याद करने का पर्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पितृ पक्ष केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने पूर्वजों के तप, त्याग और योगदान को स्मरण करने का अवसर है। उनके अनुसार यह परंपरा व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़ती है और वर्तमान पीढ़ी को अपने दायित्वों का बोध कराती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि पूर्वजों की विरासत को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उनके संस्कारों और मूल्यों को अपने व्यवहार में भी उतारें।
शाहजहां और औरंगजेब का प्रसंग किया साझा
मुख्यमंत्री ने पितृ पक्ष की परंपरा और पूर्वजों के प्रति भारतीय दृष्टिकोण को समझाने के लिए आगरा किले और शाहजहां-औरंगजेब से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को आगरा किले में नजरबंद रखा था, तब शाहजहां ने उसे पत्र लिखकर भारतीय परंपरा का संदर्भ दिया था। मुख्यमंत्री के संदेश के अनुसार, इस प्रसंग में यह बात सामने आती है कि सनातन परंपरा में दिवंगत पूर्वजों के लिए भी जल अर्पित करने की परंपरा रही है। मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग के माध्यम से बुजुर्गों के सम्मान और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता के भाव को रेखांकित किया।
बुजुर्गों का सम्मान करने की अपील
योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की कि परिवार और समाज में बुजुर्गों का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी परंपराओं, मूल्यों और पीढ़ियों के बीच बने संबंधों में होती है। उन्होंने कहा कि पहले की पीढ़ियों ने जो विरासत सौंपी है, उसे संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों को अधिक समृद्ध विरासत देना वर्तमान पीढ़ी का धर्म है।
संचारी रोगों की रोकथाम के लिए भी अभियान
मुख्यमंत्री ने पितृ पक्ष के संदेश के साथ प्रदेश में संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर भी लोगों से सहयोग की अपील की। उत्तर प्रदेश में 1 से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद 12 से 31 अक्टूबर तक दस्तक अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत स्वच्छता, जलभराव की रोकथाम, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और लोगों को संक्रामक बीमारियों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।
पूर्वी यूपी से इंसेफेलाइटिस के खात्मे पर जोर
मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश से इंसेफेलाइटिस के खात्मे के लिए जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लोगों की सहभागिता से ऐसे लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं, जिन्हें कभी मुश्किल माना जाता था। उन्होंने प्रदेशवासियों से घर और आसपास साफ-सफाई रखने, जलभराव नहीं होने देने और बुखार को सामान्य न समझकर गंभीरता से लेने की अपील की। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह और उपचार लेने पर भी जोर दिया गया। इस तरह मुख्यमंत्री की पाती में एक ओर पितृ पक्ष के माध्यम से पूर्वजों, बुजुर्गों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छता और जनभागीदारी के जरिए संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर लोगों से सक्रिय सहयोग की अपील की गई है।