कड़ाके की ठंड के बावजूद ब्रह्म मुहूर्त से संगम की ओर बढ़ते श्रद्धालुओं का रेला आज की पूर्णिमा को विशेष बना रहा है। यह केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय आस्था और परंपरा का सजीव उत्सव है।
संगम पर श्रद्धा का विराट समागम
तड़के चार बजे से ही संगम तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़नी शुरू हो गई थी। अनुमान है कि दिन भर में श्रद्धालुओं की संख्या एक करोड़ से अधिक हो जाएगी। संगम पर खड़े होकर गंगा, यमुना और सरस्वती का दिव्य मिलन देखने भर से मन में आध्यात्मिक उर्जा का संचार होता है।
कल्पवास का पवित्र समापन
माघ मास में गंगा की रेती पर एक महीने तक कठिन व्रत व नियमों का पालन करने वाले कल्पवासियों के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है। यह उनके एक मास के तप, साधना और संयम का अंतिम दिवस है। स्नान के उपरांत वे मां गंगा से आशीर्वाद लेकर अपने घर वापसी की तैयारी करेंगे, मन में एक नई आध्यात्मिक चेतना लिए हुए।
अमृत स्नान का अद्भुत महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघी पूर्णिमा के दिन संगम का जल अमृततुल्य हो जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु स्वयं जल में निवास करते हैं। इसलिए इस दिन किया गया स्नान, दान और पूजा अनेक जन्मों के पापों को हर लेने वाला माना गया है।
दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग का विशेष प्रभाव
साल 2026 की यह पूर्णिमा ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ मानी जा रही है। रवि-पुष्य नक्षत्र के साथ सात अन्य शुभ योगों का संयोग आज के दिन को और भी पवित्र बना देता है। विद्वानों के अनुसार, ऐसे संयोजन में किए गए धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक मिलता है।
मेला क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्था का सुचारू संचालन
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन अतिसतर्क है। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। घाटों को सुरक्षित बनाया गया है, गोताखोर मुस्तैद हैं और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष मार्ग निर्धारित किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसों और ट्रेनों का संचालन भी किया जा रहा है, जिससे आस्था का यह पर्व बिना किसी व्यवधान के संपन्न हो सके।
प्रयागराज की पूर्णिमा—आस्था, अध्यात्म और संस्कारों का शिखर
आज का दिन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का वह जीवंत स्वरूप है जो करोड़ों लोगों को एक सूत्र में जोड़ता है। माघी पूर्णिमा का यह अपूर्व समागम आने वाली पीढ़ियों को भी आस्था की उसी पवित्र धारा से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
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