उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, जिसे लेकर राजधानी लखनऊ में तैयारी अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। सत्र की शुरुआत राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण से होगी, जिसमें सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का उल्लेख रहने वाला है। हालांकि, इस बार सत्र की पृष्ठभूमि में विपक्ष पहले से ज्यादा आक्रामक दिखाई दे रहा है और एसआईआर विवाद तथा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी कर रहा है। यह साफ संकेत है कि सत्र के दौरान सदन का माहौल गर्म रहने वाला है।
11 फरवरी को पेश होगा रिकॉर्ड आकार का बजट
यूपी सरकार इस बार लगभग 9 लाख करोड़ रुपये मूल्य का बजट पेश कर सकती है, जो प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय खाका होगा। पिछले वर्ष 8.08 लाख करोड़ के बजट की तुलना में इस बार वृद्धि संभावित है, जिससे सरकार की विकास प्राथमिकताओं को मजबूती मिलेगी। बजट में बुनियादी ढांचे के विस्तार, सड़कों, पुलों, शहरी विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण विकास पर बड़ा फोकस रहने का अनुमान है। सरकार की कोशिश है कि तेज विकास दर के साथ-साथ जन–सुविधाओं को व्यापक रूप से बढ़ाया जाए।
सत्र का विस्तृत कार्यक्रम और विधायी कार्रवाई
कार्यक्रम के अनुसार, 10 फरवरी को दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगी। 11 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट पेश किया जाएगा, जिसके साथ ही अभिभाषण पर चर्चा का दौर शुरू होगा। 12 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा और 13 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदस्यों के प्रश्नों एवं टिप्पणियों का जवाब देंगे। सत्र का अंतिम चरण 16 से 20 फरवरी तक विभागीय बजट प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा के लिए निर्धारित किया गया है।
विपक्ष का रुख और संभावित मुद्दों की आक्रामकता
सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दलों की रणनीतियों से स्पष्ट है कि वे एसआईआर विवाद, कानून व्यवस्था, महंगाई, कृषि से जुड़े मुद्दों और पिछली नीतिगत घोषणाओं के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से जवाब मांगेंगे। शीतकालीन सत्र में जिन मुद्दों ने सदन को गरमाया था, वे इस बार भी चर्चा के केंद्र में रहने की पूरी संभावना है। सरकार के लिए यह चुनौती होगी कि विकास-केंद्रित बजट पर विपक्ष की तीखी आलोचनाओं के बीच सदन को सुचारू रूप से चलाया जाए।
प्रदेश की विकास दृष्टि और बजट से जुड़ी अपेक्षाएँ
यूपी सरकार का दावा है कि आगामी बजट प्रदेश को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाली परियोजनाओं को गति देगा। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, औद्योगिक गलियारों, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, स्मार्ट सिटी विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनस्तर सुधारने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए जा सकते हैं। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के मोर्चे पर भी बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। यह बजट नीतिगत पारदर्शिता, तेज आर्थिक वृद्धि और जनहितकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
विकास और राजनीतिक चुनौती के बीच संतुलन की परीक्षा
उत्तर प्रदेश का यह बजट सत्र केवल वित्तीय दस्तावेज पेश करने का औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक संदेश स्थापित करने का मंच भी है। एक ओर सरकार राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष शासन के हर पहलू की गहन समीक्षा करेगा। ऐसे में 9 से 20 फरवरी तक चलने वाला यह सत्र विकास, पारदर्शिता, जवाबदेही और राजनीतिक समझदारी की परीक्षा बनकर उभरेगा।
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