सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग में आयोजित उत्तर प्रदेश दिवस समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति सीमाओं की मोहताज नहीं है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की समृद्ध परंपराओं, लोकसंस्कृति और कलात्मक विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रवासी भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
प्रवासी समुदाय का अपनी जड़ों से गहरा जुड़ाव
सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सिंगापुर में रह रहे उत्तर प्रदेश मूल के लोगों का अपने राज्य और पूर्वजों से भावनात्मक रिश्ता बेहद मजबूत है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक निरंतरता का उदाहरण बताते हुए कहा कि यही जुड़ाव भारत की सांस्कृतिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाता है।
उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने की पहल
उच्चायुक्त ने प्रवासी समुदाय से अपील की कि वे अपने सिंगापुर के मित्रों को उत्तर प्रदेश लेकर जाएं, ताकि वे राज्य की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और आर्थिक संभावनाओं को नजदीक से समझ सकें। उन्होंने कहा कि पर्यटन के माध्यम से उत्तर प्रदेश की जीवंतता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिल सकती है।
कला, शिल्प और संस्कृति की आकर्षक प्रदर्शनी
कार्यक्रम के दौरान कांच और पीतल के पारंपरिक बर्तनों सहित उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई। इन कलाकृतियों ने राज्य की हस्तशिल्प परंपरा और कारीगरों की उत्कृष्ट कला का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया। साथ ही, छात्रों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से रूबरू कराया।
सीमाओं से परे उत्तर प्रदेश दिवस की भावना
सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी और तमिल भाषा कार्यक्रम की वरिष्ठ व्याख्याता एवं संयोजक संध्या सिंह ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि सिंगापुर में पहली बार उत्तर प्रदेश दिवस राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर संस्कृतियों के वैश्विक संगम स्थल तक पहुंचा है। उनके अनुसार, यह आयोजन उत्तर प्रदेश की पहचान को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा बना रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त उदाहरण
लगभग 150 विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में संपन्न यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावी उदाहरण बना। उत्तर प्रदेश दिवस ने न केवल प्रवासी भारतीयों को भावनात्मक रूप से जोड़ा, बल्कि विदेशी नागरिकों के बीच भी भारत की सांस्कृतिक गहराई और विविधता के प्रति उत्सुकता जगाई।
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