उत्तर प्रदेश सरकार और वन विभाग द्वारा पिछले वर्षों में किए गए संरक्षण प्रयास अब ठोस परिणाम देने लगे हैं। प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करने, अवैध शिकार रोकने, और सारस बाहुल्य क्षेत्रों के वैज्ञानिक प्रबंधन ने मिलकर इन पक्षियों की संख्या में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की है। यही कारण है कि सारस अब केवल कुछ इलाकों में सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश के व्यापक भूभाग में इसकी उपस्थिति बढ़ी है और यह राज्य की पर्यावरणीय समृद्धि का प्रतीक बनता जा रहा है।
शीतकालीन गणना में दर्ज हुई रिकॉर्ड संख्या
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि राज्य में सारस की प्रतिवर्ष दो बार—ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन—गणना की जाती है। इस वर्ष 68 वन प्रभागों में की गई शीतकालीन गणना में कुल 20,628 सारस दर्ज किए गए। पिछले वर्ष यह संख्या 19,994 थी, और इस प्रकार इस बार 634 नए सारसों का इज़ाफ़ा दर्ज हुआ है। इस वृद्धि ने यह साफ कर दिया है कि संरक्षण व्यवस्था न केवल प्रभावी है बल्कि सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
नागरिकों की भागीदारी से मजबूत हुई पहल
इस वर्ष की गणना प्रक्रिया में वन विभाग कर्मियों के साथ-साथ लगभग 10 हज़ार नागरिकों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। यह सहभागिता पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता और सारस संरक्षण के प्रति समाज की संवेदनशीलता को दर्शाती है। गणना से पूर्व सारस बाहुल्य क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया, जिससे इनकी वास्तविक संख्या का सटीक अनुमान लगाया जा सका। यह संयुक्त प्रयास दर्शाता है कि जब सरकार और समाज साथ कार्य करते हैं, तभी वन्यजीव संरक्षण के परिणाम अधिक प्रभावशाली बनते हैं।
पिछले तीन वर्षों में दिखाई दी सतत वृद्धि
राज्य में सारसों की संख्या में वृद्धि का यह क्रम पिछले तीन वर्षों में लगातार जारी है। वर्ष 2023 में प्रदेश में 19,196 सारस थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 19,994 हो गई। वर्तमान शीतकालीन सत्र में यह संख्या 20,628 के आंकड़े को पार कर गई है। इस निरंतर वृद्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रदेश में सारस के संरक्षण हेतु किए गए प्रयासों की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों ही उच्च स्तर पर हैं।
इटावा वन प्रभाग में सर्वाधिक सारस
राज्यव्यापी गणना में इटावा वन प्रभाग सबसे आगे रहा, जहां कुल 3304 सारस पाए गए। इसके अतिरिक्त 10 वन प्रभाग ऐसे रहे जिनमें प्रत्येक में 500 से अधिक सारस दर्ज किए गए। 29 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 100 से 500 के बीच थी, जबकि शेष 29 वन प्रभागों में 100 से कम सारस मिले। यह विविधता प्रदेश के अलग-अलग भागों में सारस के विस्तृत वितरण को प्रदर्शित करती है और यह संकेत भी देती है कि संरक्षण प्रयासों का प्रभाव व्यापक तौर पर देखा जा रहा है।
Comments (0)