मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने हालिया संबोधन में एक बेहद कठोर संदेश देते हुए कहा कि “बंट गए तो कटने के रास्ते खुल जाएंगे।” यह बयान सीधे तौर पर उन ताकतों पर प्रहार था, जिन्हें वे समाज में विभाजन फैलाने वाला मानते हैं। उनके शब्दों में चुनावी रणनीति के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और सामाजिक समरसता की दिशा भी स्पष्ट दिखाई दी। योगी का यह संदेश आने वाले चुनावी दिनों में बहस का प्रमुख मुद्दा बनता नजर आ रहा है।
समाज को बांटने की राजनीति पर सीधा हमला
अपने संबोधन में योगी ने विपक्षी पार्टियों को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल वोटबैंक के लिए समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व अगर सफल हुए, तो इसका परिणाम हिंसा, अशांति और अव्यवस्था के रूप में सामने आएगा। योगी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की जातीय एकता और सामाजिक सौहार्द ही राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
विकास और सुरक्षा को बताया सरकार की प्राथमिकता
सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में हुए सुधारों को भी रेखांकित किया और कहा कि उनकी सरकार ने ‘फूट डालो और राज करो’ की राजनीति को जड़ से खत्म किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, निवेश के अवसर और विकास का स्थिर वातावरण तभी संभव है, जब समाज एकजुट रहे। योगी के अनुसार, “विकास वहीं फलता-फूलता है, जहाँ भय नहीं होता।”
विपक्ष पर पलटवार और चुनावी धार
योगी के बयान को प्रखर राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने बिना किसी नाम लिए विपक्ष को चेताया कि नकारात्मक राजनीति करके जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता अब जागरूक है और वह उन शक्तियों को पहचानती है जो समाज को विभक्त करने की कोशिश करती हैं। ऐसे बयानों से यह स्पष्ट है कि आगामी दिनों में राजनीतिक संघर्ष और भी तीखा होने वाला है।
यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल
योगी आदित्यनाथ का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर गया है। समर्थक इसे सख्त नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टिकोण का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे चुनावी ध्रुवीकरण का प्रयास बता रहा है। लेकिन इतना निश्चित है कि सीएम योगी का यह कथन आने वाले दिनों में जनचर्चा, मीडिया बहस और राजनीतिक मंचों पर केंद्र बिंदु बना रहेगा।
Comments (0)