नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड नेता और सांसद महुआ मोइत्रा एक नए कानूनी विवाद में फंस गई हैं। दिल्ली के मंदिर मार्ग साइबर पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें उन पर 'फेक न्यूज' और 'भ्रामक कंटेंट' फैलाने का गंभीर आरोप लगा है।
AI वीडियो के जरिए छवि बिगाड़ने का आरोप
शिकायत के अनुसार, महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया है जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग करके बनाया गया बताया जा रहा है। इस वीडियो के जरिए उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित IPS अधिकारी और वर्तमान में बंगाल चुनाव में ऑब्जर्वर के रूप में तैनात अजय पाल शर्मा की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करना है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब IPS अजय पाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे TMC उम्मीदवार जहांगीर खान और अन्य को चुनाव में गड़बड़ी न करने की सख्त चेतावनी देते नजर आ रहे थे।
TMC का रुख: पार्टी ने इसे असंवैधानिक कृत्य बताते हुए अधिकारी को अदालत में घसीटने की चेतावनी दी है।
महुआ का हमला: महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कथित पुराने वीडियो साझा कर अधिकारी पर निजी हमले किए।
अखिलेश यादव का समर्थन: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर टीएमसी का साथ देते हुए अजय पाल शर्मा को 'भाजपा का एजेंट' करार दिया है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
जहाँ एक तरफ टीएमसी इसे डराने-धमकाने की राजनीति बता रही है, वहीं भाजपा और शिकायतकर्ता इसे संवैधानिक संस्थाओं और अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने की साजिश करार दे रहे हैं। दिल्ली पुलिस अब इस मामले में तकनीकी जांच कर रही है कि क्या वाकई वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी।