कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोजागरी लक्ष्मी पूजा के मौके पर एक मुलाकात ने नई सियासी चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहली बार सुधीप बंद्योपाध्याय के घर लक्ष्मी पूजा में शामिल होने पहुंचे। मुख्यमंत्री का कहना है कि वह केवल निमंत्रण का सम्मान करने और पूजा में शामिल होने आए हैं। लेकिन तृणमूल से दूरी और एनडीए से सुधीप बंद्योपाध्याय के जुड़ाव के बीच इस मुलाकात को कोलकाता नगर निगम चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सुवेंदु अधिकारी ने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा और सुधीप बंद्योपाध्याय की राजनीतिक भूमिका की तारीफ भी की।
लक्ष्मी पूजा में सुधीप बंद्योपाध्याय के घर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कोजागरी लक्ष्मी पूजा के अवसर पर सुधीप बंद्योपाध्याय के घर पहुंचे। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बार है, जब सुवेंदु अधिकारी सुधीप बंद्योपाध्याय के घर आयोजित लक्ष्मी पूजा में शामिल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह पूजा के निमंत्रण पर वहां पहुंचे हैं। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इस मुलाकात को लेकर बंगाल की सियासत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस से सुधीप बंद्योपाध्याय की दूरी और एनडीए से उनके जुड़ाव के बीच इस मुलाकात के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
‘निमंत्रण मिला, इसलिए आया’, सुवेंदु ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना
सुधीप बंद्योपाध्याय के घर पूजा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। सुवेंदु के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस में रहने के दौरान सुधीप बंद्योपाध्याय ने कई बार तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने घर की पूजा में आमंत्रित किया था, लेकिन उनके दावे के अनुसार, ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों में एक बार भी वहां नहीं पहुंचीं। वहीं, मुख्यमंत्री बनने के बाद निमंत्रण मिलने पर सुवेंदु अधिकारी पूजा में शामिल होने पहुंच गए। उन्होंने इसे बंगाल की सामाजिक परंपरा और शिष्टाचार का हिस्सा बताया। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग, एनडीए से जुड़ाव का दिया हवाला
सुधीप बंद्योपाध्याय के साथ अपने संपर्क को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सुधीप बंद्योपाध्याय देश के प्रधानमंत्री के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग में शामिल हो रहे हैं और एनडीए से जुड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा हैं। ऐसे में उनके घर पूजा में जाने या उनसे संपर्क रखने में कोई परेशानी नहीं है। मुख्यमंत्री के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात के दौरान किसी राजनीतिक गठबंधन या चुनावी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
‘सुधीप ने कभी बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला नहीं किया’, मुख्यमंत्री ने की तारीफ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सुधीप बंद्योपाध्याय की राजनीतिक भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कभी बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला नहीं किया। सुवेंदु के मुताबिक, सुधीप बंद्योपाध्याय के खिलाफ बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले को लेकर इस तरह की कोई शिकायत भी सामने नहीं आई है। बंगाल में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव के माहौल में मुख्यमंत्री का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि क्या शुभेंदु का यह बयान तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर अप्रत्यक्ष हमला है। हालांकि, इस टिप्पणी के आधार पर किसी राजनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं की जा सकती।
कोलकाता नगर निगम चुनाव से पहले नए सियासी समीकरण की चर्चा
कोलकाता नगर निगम चुनाव को लेकर बंगाल की राजनीति में पहले से ही अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में सुधीप बंद्योपाध्याय के घर मुख्यमंत्री का पहुंचना और उनकी खुलकर तारीफ करना नई चर्चा को जन्म दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में सुधीप बंद्योपाध्याय और बीजेपी के बीच संभावित तालमेल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, बीजेपी नेतृत्व की ओर से इस तरह की अटकलों को खारिज किए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल, सुधीप बंद्योपाध्याय और बीजेपी के बीच गठबंधन या संयुक्त रूप से उम्मीदवार उतारने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में इन चर्चाओं को अभी राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
शिष्टाचार की मुलाकात या राजनीति का नया संदेश?
कोजागरी लक्ष्मी पूजा के अवसर पर हुई यह मुलाकात भले ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक शिष्टाचार तक सीमित हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायनों पर चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर सुधीप बंद्योपाध्याय का तृणमूल कांग्रेस से दूर होना और एनडीए से उनका जुड़ाव, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री का उनके घर पहुंचना और उनकी तारीफ करना—इन घटनाक्रमों ने बंगाल की राजनीति में नई संभावनाओं पर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि यह मुलाकात केवल पूजा के निमंत्रण तक सीमित रहती है या आने वाले कोलकाता नगर निगम चुनाव से पहले कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आता है।