ईरान में चल रही आंतरिक अस्थिरता ने भारत के बासमती चावल निर्यात को गहरा झटका दिया है। लंबे समय से भारतीय बासमती का सबसे बड़ा खरीदार रहे ईरान से जुड़े व्यापारिक समीकरण फिलहाल कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। भुगतान में देरी, ऑर्डर की अनिश्चितता और बढ़ते कारोबारी जोखिम के कारण निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर भारतीय मंडियों में देखने को मिल रहा है, जहां बासमती चावल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
घरेलू बाजार में कीमतों की तेज गिरावट
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, बीते एक सप्ताह में बासमती चावल की प्रमुख किस्मों के दामों में लगभग 5 रुपए प्रति किलोग्राम तक की गिरावट आई है। लोकप्रिय किस्म 1121 की कीमत 85 रुपए प्रति किलो से घटकर 80 रुपए रह गई है, जबकि 1509 और 1718 किस्मों के भाव 70 रुपए से गिरकर 65 रुपए प्रति किलो पर आ गए हैं। खरीदारों की झिझक और सौदों में देरी ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया है।
भुगतान जोखिम और व्यापारिक अनिश्चितता
निर्यातकों का कहना है कि ईरान में अशांति के कारण भुगतान चक्र बाधित हो गया है। कई आयातक समय पर भुगतान करने या अनुबंधों को पूरा करने में असमर्थता जता रहे हैं। इससे न केवल मौजूदा सौदे अटके हैं, बल्कि नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार भी धीमी हो गई है। इस अनिश्चित माहौल में निर्यातकों को वित्तीय जोखिम उठाना पड़ रहा है, जिसका असर अंततः घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
आईआरईएफ की सलाह और सतर्कता की अपील
आईआरईएफ ने निर्यातकों को ईरान से जुड़े अनुबंधों का पुनर्मूल्यांकन करने की सलाह दी है। संगठन ने सुरक्षित भुगतान विकल्प अपनाने, जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देने और जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने से बचने का सुझाव दिया है। आईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि ईरान में जारी संकट के चलते व्यापारिक माध्यम बाधित हुए हैं और भुगतान में देरी से निर्यातकों का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।
व्यापारिक आंकड़े और मौजूदा स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने ईरान को 5.99 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 468.10 मिलियन अमेरिकी डॉलर रही। हालांकि मौजूदा हालात में ईरानी आयातकों की भुगतान क्षमता और प्रतिबद्धताओं पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे आने वाले महीनों में निर्यात प्रवाह पर असर पड़ने की आशंका है।
वैकल्पिक बाजारों की तलाश
आईआरईएफ ने निर्यातकों से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप जैसे वैकल्पिक बाजारों पर फोकस बढ़ाने की अपील की है। संगठन ने अमेरिकी शुल्क को लेकर भी चिंता जताई है, लेकिन साथ ही यह भरोसा दिलाया है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय बासमती की मजबूत मांग बनी हुई है। ऐसे में रणनीतिक बाजार विस्तार और सतर्क व्यापारिक फैसले इस संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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