रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध, ईरान के साथ बढ़ती तनातनी और वेनेजुएला को लेकर अमेरिका के सख्त रुख ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर बना दिया है। इन हालात में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तेल आयात की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब भारत किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्रोतों का व्यापक विस्तार कर रहा है।
50 से अधिक देशों से तेल खरीदने की दिशा में कदम
भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर जोखिम नहीं उठाना चाहता। इसी सोच के तहत भारत अब 50 से ज्यादा देशों से तेल आयात कर रहा है। पेट्रोलियम मंत्री भी यह संकेत दे चुके हैं कि सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए डायवर्सिफिकेशन ही सबसे मजबूत रास्ता है।
महाराष्ट्र से छोटे देश से आया 20 लाख बैरल तेल
इस रणनीति के तहत भारत ने अब इक्वाडोर जैसे छोटे दक्षिण अमेरिकी देश से कच्चा तेल खरीदा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने इक्वाडोर से 20 लाख बैरल क्रूड ऑयल की डील की है। यह देश भौगोलिक रूप से महाराष्ट्र से भी छोटा है, लेकिन ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भारत के लिए एक नया और अहम विकल्प बनकर उभरा है।
भारत को मिली इक्वाडोर के तेल की पहली खेप
यह भारत के लिए इक्वाडोर के ओरिएंटे ग्रेड कच्चे तेल की पहली खेप है। इस तेल की सप्लाई मार्च के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा सफल रहता है, तो आने वाले महीनों में भारत इक्वाडोर से और अधिक तेल खरीद सकता है।
रूसी तेल की कमी ने बढ़ाई वैकल्पिक तलाश
अमेरिका और यूरोपीय यूनियन द्वारा रूसी तेल उत्पादकों और शिपिंग कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों का सीधा असर भारत के तेल आयात पर पड़ा है। रूस से तेल की उपलब्धता घटने के कारण भारतीय रिफाइनर अब तेजी से वैकल्पिक देशों की ओर रुख कर रहे हैं, ताकि उत्पादन और आपूर्ति पर असर न पड़े।
अमेरिका के साथ ट्रेड डील को भी मिलेगा बल
रूस से आयात घटाकर अन्य देशों से तेल खरीदने से भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह कदम भारत को वैश्विक मंच पर एक संतुलित और व्यावहारिक ऊर्जा नीति अपनाने वाले देश के रूप में स्थापित करता है।
टेंडर के जरिए खरीदा गया खट्टा कच्चा तेल
सूत्रों के अनुसार, IOC ने यह 20 लाख बैरल मध्यम-भारी खट्टा कच्चा तेल टेंडर प्रक्रिया के जरिए खरीदा है। हालांकि कीमत और विक्रेता की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है और कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया है।
दक्षिण अमेरिका की ओर बढ़ती भारत की दिलचस्पी
आमतौर पर IOC अपनी अधिकांश तेल जरूरतें रूस और मिडिल ईस्ट से पूरी करती रही है। दक्षिण अमेरिका से तेल खरीद अब तक सीमित रही है, लेकिन हालात बदल रहे हैं। कंपनी के पास मेक्सिको, ब्राजील और कोलंबिया जैसे देशों के साथ सप्लाई समझौते हैं और पिछले महीने ही IOC ने कोलंबिया से भी 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था।
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