दिसंबर महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित रिटेल महंगाई 1.33 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा बाजार के पूर्वानुमान से कम है और महंगाई में नियंत्रित रुख को दर्शाता है।
बाजार अनुमान से कम रही महंगाई
विश्लेषकों ने दिसंबर में खुदरा महंगाई 1.56 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे नीचे रहे। इससे यह संकेत मिलता है कि कीमतों पर दबाव फिलहाल सीमित बना हुआ है और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल रही है।
पिछले महीनों की तुलना में क्या बदला
नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई 0.71 प्रतिशत और अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत दर्ज की गई थी। अक्टूबर का स्तर पिछले 14 वर्षों में सबसे निचला माना गया था। दिसंबर में आई बढ़त के बावजूद महंगाई अब भी बेहद निचले स्तर पर बनी हुई है।
RBI के कंफर्ट जोन से लगातार नीचे
खास बात यह है कि खुदरा महंगाई लगातार चौथे महीने भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी नीचे बनी हुई है। यह लगातार दूसरा तिमाही है जब महंगाई दर केंद्रीय बैंक के कंफर्ट जोन से नीचे रही है, जो आर्थिक स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
RBI ने घटाया महंगाई अनुमान
महंगाई में लगातार नरमी को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक को आने वाले महीनों में भी महंगाई नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।
मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीद मजबूत
कम महंगाई दर के चलते अब मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई इसी तरह नियंत्रण में रही, तो भविष्य में ब्याज दरों को लेकर आरबीआई लचीला रुख अपना सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था को और गति मिल सकती है।
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