नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में इस महीने एक बड़ा आईपीओ दस्तक देने की तैयारी में है। रिलायंस ग्रुप की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपना आईपीओ लाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का अनुमानित आकार करीब 3.8 अरब डॉलर यानी लगभग 33 हजार करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। कंपनी की ओर से आईपीओ की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। ऐसे में देश और दुनिया के निवेशकों की नजर इस बड़े इश्यू पर बनी हुई है।
अक्टूबर में आ सकता है Jio Platforms का IPO
रिपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अपना फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट यानी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर सकती है। कंपनी की योजना दशहरा से पहले एंकर निवेशकों के लिए इश्यू खोलने की बताई जा रही है। इसके बाद आम निवेशकों के लिए आईपीओ 23 अक्टूबर से पहले सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। अगर पूरी प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो अक्टूबर के अंत तक जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग हो सकती है। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई पर ट्रेड करने की तैयारी में हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स ने जून में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था। इसके बाद 28 अगस्त को सेबी से कंपनी को आईपीओ की मंजूरी मिल चुकी है। अब निवेशकों की नजर इश्यू की अंतिम तारीख, प्राइस बैंड और शेयर आवंटन से जुड़ी जानकारी पर है।
3.8 अरब डॉलर का हो सकता है इश्यू
जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ करीब 3.8 अरब डॉलर का हो सकता है, जिससे यह भारतीय बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो जाएगा। कंपनी की संभावित एंटरप्राइज वैल्यूएशन करीब 143 से 146 अरब डॉलर आंकी जा रही है। भारतीय रुपये में यह वैल्यूएशन 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। कंपनी का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू के रूप में लाने की योजना है। इसमें करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जा सकते हैं। खास बात यह है कि इस इश्यू में मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल यानी OFS नहीं होगा। इसका मतलब है कि आईपीओ से जुटाई जाने वाली पूरी रकम कंपनी के पास जाएगी। रिलायंस ग्रुप के लिए भी यह आईपीओ खास है, क्योंकि 2008 के बाद ग्रुप का यह पहला आईपीओ होगा।
IPO से जुटाए पैसे का क्या होगा इस्तेमाल?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी की कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा। इस इश्यू में मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाने की योजना नहीं है। यानी आईपीओ के जरिए आने वाली पूरी रकम कंपनी के कारोबार में इस्तेमाल की जाएगी। जुटाई गई राशि का एक बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के कर्ज को चुकाने में लगाया जा सकता है। इसके अलावा रकम का इस्तेमाल कंपनी की सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा। कंपनी अपने डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार के विस्तार के लिए भी इस पूंजी का इस्तेमाल कर सकती है। फ्रेश इश्यू होने की वजह से कंपनी को सीधे नई पूंजी मिलेगी। निवेशकों के लिए यह बात अहम होगी कि कंपनी इस नई पूंजी का इस्तेमाल किस तरह अपने कारोबार और भविष्य के विस्तार में करती है।
रिलायंस जियो की टेलीकॉम बाजार में मजबूत पकड़
रिलायंस जियो इन्फोकॉम देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल है और इसके पास करोड़ों ग्राहक हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मोबाइल कनेक्शन के मामले में जियो की बाजार हिस्सेदारी करीब 39.29 प्रतिशत है। कंपनी के पास करीब 50.6 करोड़ यानी 506 मिलियन मोबाइल ग्राहक हैं। फिक्स्ड-लाइन कनेक्शन के क्षेत्र में भी जियो की मजबूत मौजूदगी है। इस सेगमेंट में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी करीब 32.89 प्रतिशत बताई गई है। जियो के पास करीब 15.79 करोड़ यानी 157.9 मिलियन फिक्स्ड-लाइन कनेक्शन हैं। टेलीकॉम के साथ कंपनी डिजिटल सेवाओं, ब्रॉडबैंड और अन्य डिजिटल कारोबार में भी विस्तार कर रही है। यही वजह है कि प्रस्तावित आईपीओ को सिर्फ टेलीकॉम नहीं, बल्कि भारत के बड़े डिजिटल बिजनेस आईपीओ के तौर पर भी देखा जा रहा है।
Jio Platforms में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
फिलहाल जियो प्लेटफॉर्म्स में मुकेश अंबानी की अगुआई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की करीब 66.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं, दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां मेटा और गूगल भी जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश कर चुकी हैं। दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 17.7 प्रतिशत बताई गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स में इन वैश्विक कंपनियों का निवेश कंपनी की डिजिटल क्षमता और कारोबारी संभावनाओं को दर्शाता है। आईपीओ के जरिए कंपनी सार्वजनिक बाजार में प्रवेश करेगी, जिससे आम निवेशकों को भी इसमें हिस्सेदारी लेने का मौका मिलेगा। वैश्विक रोडशो के दौरान विदेशी निवेशकों की ओर से भी कंपनी को अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में आईपीओ को लेकर घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। अब सबसे ज्यादा नजर कंपनी के अंतिम इश्यू साइज, प्राइस बैंड और शेयरों की लिस्टिंग वैल्यूएशन पर रहेगी।
रिलायंस ग्रुप के लिए क्यों खास है Jio IPO?
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ रिलायंस ग्रुप के लिए कई मायनों में अहम माना जा रहा है। यह 2008 के बाद रिलायंस ग्रुप का पहला आईपीओ होगा। इसके अलावा यह रिलायंस ग्रुप की किसी कंज्यूमर बिजनेस वाली कंपनी का पहला आईपीओ भी होगा। रिलायंस ने पिछले कुछ वर्षों में जियो को देश के बड़े डिजिटल और टेलीकॉम प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है। अब आईपीओ के जरिए जियो प्लेटफॉर्म्स को सार्वजनिक बाजार में उतारने की तैयारी है। अगर प्रस्तावित समयसीमा के मुताबिक आईपीओ आता है, तो अक्टूबर के अंत तक इसकी लिस्टिंग हो सकती है। इतने बड़े इश्यू के कारण इसका असर भारतीय शेयर बाजार के आईपीओ सेगमेंट पर भी देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण जानकारी कंपनी की ओर से जारी होने वाले अंतिम ऑफर डॉक्यूमेंट में सामने आएगी।